दिल्ली का फेमस स्ट्रीट फूड और कैसे शुरू कर सकते हैं आप इसका बिजनेस भारत में कहीं भी

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दिल्ली का फेमस स्ट्रीट फूड और कैसे शुरू कर सकते हैं आप इसका बिजनेस भारत में कहीं भी

दिल्ली तो देश की राजधानी है। यहां पर पूरे देश के 28 राज्यों से लोग किसी न किसी काम से आते-जाते रहते हैं। यहां आने जाने वालों का दिल्ली पूरे दिल से स्वागत करती है। दिल्ली को पूरे देश की संस्कृति के संगम का केन्द्र कहा जाये तो गलत नहीं होगा। यहां देश के सभी राज्यों के लोगों के अलावा कई देशों के लोगों का आना-जाना लगा रहता है। चाहे वो किसी सरकारी काम से आये अथवा उत्तर भारत के पर्यटन स्थल जैसे जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र हो या राजस्थान गुजरात, गोवा के पर्यटन स्थल जाने वाले हों। इन विदेशियों को सबसे पहले दिल्ली आना होता है। विभिन्न संस्कतियों को समेटे दिल्ली का स्ट्रीट फूड भी काफी रिच होता है।

दिल्ली और दिल्ली के आस-पास नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद सरकारी कार्यालयों, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों, टूरिस्ट प्लेसों, मनोरंजन केन्द्रों, शॉपिंग माल्स में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। यहां के औद्योगिक क्षेत्रों में मुंबई के बाद सबसे अधिक मानव श्रम काम करता है। इस विशाल भीड़ में एक से दो परसेंट लोग ऐसे होंगे जो महंगे होटलों के खर्चे उठा सकते हैं। बाकी सारे लोग इन स्ट्रीट फूड स्टाल्स पर ही निर्भर रहते हैं। दिल्ली की व्यस्त सड़Þकों के किनारे खाने-पीने के छोटे-छोटे खोमचे या सिर पर थाल, साइकिल पर, ठेले पर स्वादिस्ट व्यंजन बेचते हुए लोग नजर आ जायेगे। इनमें से कुछ लोग एक हजार से कम रुपये से अपना बिजनेस करते हें और इतने ही रुपये मुनाफा कमाकर अपने घर ले जाते हैं। इसके अलावा यहां पर भोजन वैन का भी चलन है। जो अपने अपने बस या ट्रक जैसे वाहनों में खाने बनाने का सामान लाते हैं और फैक्ट्रियों वा मार्केट से थोड़ी दूर पर किसी खाली स्थान में ताजा स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं और बेचकर चले जाते हैं।

कैसा है दिल्ली का फूड कल्चर?

दिल्ली का फूड कल्चर काफी मिला जुला है। यहां नार्थ इंडियन फूड के साथ मुगलई चिकन, पंजाबी खाना और मुंह में पानी लाने वाला स्ट्रीट फूड यहां का प्रमुख खान-पान की संस्कृति है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के मशहूर स्ट्रीट फूड भी आपको दिल्ली में आसानी से मिल जायेंगे। इसके साथ ही दिल्ली पूरे विश्व का प्रमुख केन्द्र है। इसलिये चाइनीज, थाई, मैक्सिकन फूड भी आसानी से मिलते हैं। आप यह कह सकते हैं कि बहुत भारी संख्या में लोगों को इस फूड बिजनेस से नौकरी व बिजनेस मिला हुआ है। हजारो-लाखों लोग इस फूड बिजनेस से अपने जीवन का गुजारा करते हैं।

दिल्ली में बिकने वाले स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड बेहद सस्ते और अच्छे होते हैं। इन फूड्स में चटपटे गोलगप्पे,ं स्वादिष्ठ छोले भटूरे, सेहतमंद पूड़ी आलू की सब्जी, रोल्स, ठंडी कुल्फी, आलू चाट, रबड़ी फालूदा, कबाब, आलू के पराठे, प्याज के लच्छे के पराठे, पंजाबी पराठा, नॉन,  आलू टिक्की,  जलेबी,  पकौड़ा, नान खटाई, बर्गर, भेल पुरी, बेसन का चिल्ला, चना जोर गरम,  दही भल्ले, समोसा चाट, छोले कुल्चे, चिकन शॉवरमा, राज कचौड़ी प्रमुख हैं। दिल्ली की लगभग प्रत्येक मार्केट में स्ट्रीट फूड आपको सड़क के किनारे बिकती दिख जायेगी। इसके बावजूद दिल्ली के जिन क्षेत्रों में आपके मुंह मेंं पानी लाने वाल मशहूर स्ट्रीट फूड मिलता है, उनमें चांदनी चौक, करोल बाग, पहाड़गंज, सदर बाजार, लाजपत नगर,राजौरी मार्केट, पुरानी दिल्ली,करोल बाग,कमला नगर मार्केटं, राजौरी गार्डन, मायापुरी, कनाट प्लेस,ं  डिफेंस कॉलोनी, पुराना किला, कमला नगर मार्केट,पीतमपुरा हैं।  इसके अलावा थोड़ा हाई स्टैंडर्ड के लोग जो हाईजेनिक यानी साफ सफाई को पसंद करते हैं तो उनके लिये लगभग हर बड़ी जगह हल्दीराम, बीकानेर और बिकानों के भी स्टॉल मिल जायेंंगे। यहां पर खाने का सामान थोड़ा महंगा मिलता है।

दिल्ली के स्ट्रीट फूड का देश में बिजनेस कैसे शुरू करें?

दिल्ली में चलने वाले स्ट्रीट फूड की संख्या इतनी है कि गिनते रह जायेंगे। एक से एक बेहतर चटपटे, स्वदिष्ठ व्यंजनों की भरमार है। उनमें से यह चुने कि आप किस तरह का व्यंजन आसानी से बना सकते हैं या उसको बनाने में आप एक्सपर्ट हैं। इसके बाद का रास्ता बहुत आसान हो जायेगा। यह जरूरी नहीं है कि दिल्ली के छोले भटूरे कर्नाटक, केरल, बंगाल,उड़ीसा में नहीं चलेंगे। बस आपको अपने विजन की जरूरत है। दिल्ली के स्ट्रीट फूड बनाने में कोई बहुत बड़ी लागत भी नहीं आती है। कम लागत में अधिक मुनाफे वाला बिजनेस है। दिल्ली और आसपास के एरिया में स्ट्रीट फूड्स बिजनेस का यह आलम है कि लोग यहां पर नौकरी करने दूर-दूर से आते हैं लेकिन जब नौकरी मिलने में परेशानी होती है तो सड़क के किनारे थोड़ी सी जगह पर ही इसका बिजनेस शुरू कर देते हैं। इसका उदाहरण आपको नोएडा की सड़क के किनारे देखने को मिल जायेगा, जहां पूरा परिवार ही आपको पूड़ी सब्जी, छोले चावल, रायता, आलू के पराठे बेचता मिल जायेगा। कहने का मतलब यह आसान बिजनेस देश में कहीं भी किया जा सकता है।

बाजारों का चुनाव सावधानी से करें

आपको बस अपने बिजनेस के लिए टारगेट तय करना है। आप जिस चीज को बेचना चाहते हैं वो किस तरह के लोगों के बीच बिकेगी और कितना ज्यादा मुनाफा होगा। जैसे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के एजूकेशन हब में भारी संख्या में स्टूडेंट बाहर से आकर पीजी में रहते हैं। पीजी में केवल रहने की व्यवस्था होती है तो वहां पास में खाने-पीने का बिजनेस जमकर चलता है। यही हाल कोटा जैसे देश के दूसरे एजूकेशन हब में रहता है। इसके अलावा प्रत्येक महानगर में सरकारी कार्यालयों की भरमार रहती है जहां पर लोग लंच अवश्य ही बाहर करते हैं। टूरिस्ट प्लेस में भी आप अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं। मनोरंजन के केन्द्र जहां पर भारीसंख्या में लोगों की आवाजाही होती है। बस और रेलवे स्टेशन भी आपके टारगेट हो सकते हैं। बस आपको यह तय करना है कि इनमें कहां से आप आसानी से अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं। बाजार का चुनाव करते समय यह भी ध्यान रखना होगा कि आप जिस तरह का स्ट्रीट फूड तैयार करने की प्लानिंग कर रहे हैं उसको बनाने के लिए कच्चे माल की सस्ती से सस्ती मार्केट आस पास ही होनी चाहिये।

दिल्ली का स्ट्रीट फूड देश में कहीं भी क्यों बिकेगा

दिल्ली के स्ट्रीट फूड का बिजनेस  देश में कहीं भी आसानी से कम पैसे में किया जा सकता है। हर एक जगह का अपना खान-पान का कल्चर अलग ही होता है। जैसे उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में पूड़ी-सब्जी का नाश्ता चलता है। वहां पर यदि गोलगप्पे खाने हैं तो आपको शाम तक उन बाजारों का इंतजार करना होगा जहां पर महिलाएं अधिकांशत: शॉपिंग करने जातीं है। इसके अलावा समोसे खस्ते का प्रचलन अधिक है। वहां पर दिल्ली के टेस्टी छोले भठूरे, छोले कुल्चे, पराठे आदि बेची जायेगी  तो लोगों को काफी पसंद आयेगा। कहने का मतलब यह है कि आप देश कि किसी हिस्से में दिल्ली के स्ट्रीट फूड का बिजनेस शुरू करेंगे तो नए-नए टेस्ट के लिए आपकी दुकान पर अवश्य ही लोग आयेंगे। उसके बाद आपकी स्किल पर डिपेंड करता है कि आपका बनाया हुआ व्यंजन इतना अधिक स्वादिष्ट हो कि खाने वाला खाते ही वाह कह कर तारीफ करे। वो खुद तो खायेगा और आसपास लोगों को बतायेगा कि दिल्ली वाले की दूकान वहां लगती है, उसमें खाने का फलां सामान बहुत टेस्टी है, वैसा आज तक नहीं खाया। तुम भी ट्राई करो। इस तरह से आपके प्रोडक्ट की माउथ कन्वेसिंग हो जायेगी और आपका बिजनेस बढ़ जायेगा।

बिजनेस में हवाई गियर लगाना चाहते हो तो ये करें

हर किसी की तमन्ना होती है आगे बढ़ते रहने की। यदि आपने देश के किसी भी जगह पर दिल्ली की स्ट्रीट फूड का बिजनेस छोटे लेबल पर शुरू किया। मान लो कि आपने पहले किसी साइकिल, ठेली पर घूम-घूम कर बाजारों में अपना स्ट्रीट फूड बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे आपके व्यंजन की लोकप्रियता बढ़ने लगी। यही नहीं इसकी चर्चा पूरे शहर में होने लगी और ग्राहक आपको तलाशने लगे। उस समय एक समस्या यह हो जायेगी कि आपका व्यंजन तलाशने वाला नया कस्टमर बाजार में आपकी खोज करेगा और आप  फेरी लगाने के चक्कर इधर से उधर घूमते रहेंगे, वह भटकने के बाद आपको खोजना बंद कर देगा। इससे आपके बिजनेस बढ़ने के चांस कम हो सकते हैं। इसके लिए समय आपको अपनी क्षमता के अनुसार  बाजार के किसी भी कोने में एक सस्ती सी दुकान लेनी होगी, जहां पर कम से कम किराये पर आपका काम चल सके। इससे प्रत्येक ग्राहक आपके पास पहुंच जायेगा। आजकल मोबाइल फोन की बहुत बड़ी सुविधा है। बाजार वाले ग्राहक अपने आप तक पहुंच जायेंगे और इसके साथ ही आपकी दुकान धीरे-धीरे मशहूर हो जायेगी और आपकी दुकान पर लोग आने लगेंगे। बस आपको अपनी क्वालिटी और टेस्ट का ध्यान रखना होगा। फिर तो आपकी दुकान पंख लगाकर चलने लगेगी।

आम के आम, गुठलियों के दाम

आम के आम गुठलियों के दाम कहावत है। इसका मतलब आपको एक काम से दोहरा फायदा हो रहा है। अधिकांशत: लोग दिल्ली या दूसरे शहरों में पैसे कमाने के लिए जाते हैं। वो वहां रहकर जितना कमाते हैं उतना ही खर्च कर डालते हैं। इस तरह के स्ट्रीट फूड का बिजनेस करके लोग अपने गांव-घर के आसपास बड़े कस्बों व शहरों में रह कर भी बिजनेस कर सकते हैं। इससे वो घर के काम काज पर भी नजर रख सकते हैं और अपना बिजनेस करके एक्स्ट्रा पैसे भी कमा सकते हैं।

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