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अपनी दुकान-गोदाम का कचरा कैसे मैनेज करें? वेस्ट-मैनेजमेंट के कुछ ज़रूरी टिप्स

अपनी दुकान-गोदाम का कचरा कैसे मैनेज करें? वेस्ट-मैनेजमेंट के कुछ ज़रूरी टिप्स

. 1 min read

क्या होता है वेस्ट मैनेजमेंट?

वेस्ट मैनेजमेंट यानि कचरा प्रबंधन के अंतर्गत वे सभी कार्य और गतिविधियां आ जाती हैं जो कचरे को शुरुआत से लेकर उसके अंतिम निबटारे तक मैनेज करती हैं। अन्य कार्यों के साथ इसमें, कचरा कलेक्शन, ट्रीटमेंट और निस्तारण से लेकर निगरानी और विनियमन तक की गतिविधियां आती हैं। रीसायकल आदि जैसी गाइडलाइन्स देने वाले वेस्ट मैनेजमेंट से सम्बंधित कानूनी एवं नियामक तंत्र भी इसी के अंतर्गत आते हैं।

कचरा प्रबंधन क्यों है ज़रूरी?

कचरा प्रबंधन सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतत विकास ऐसे विकास को कहा जाता है जो पर्यावरण का ख्याल रखते हुए हुए उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करता है। कचरे को सही ढंग से मैनेज करने से जो पुनः उपयोगिता का चक्र बनता है उससे हमारी प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता कम होती है जिससे उनके दोहन में कमी आती है और उनका संरक्षण होता है। यही कारण है कि सतत विकास की योजनाओं में कचरा प्रबंधन का मुख्य स्थान है।

आपके बिज़नेस पर कचरा प्रबंधन का प्रभाव -

कचरा प्रबंधन का आपके बिज़नेस पर आपकी सोच से भी अधिक प्रभाव हो सकता है। जिस तरह से वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कॉस्ट बढ़ रहे हैं, उसके साथ में उपभोक्ताओं के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। ऐसे में एनवायरनमेंट फ्रेंडली वेस्ट मैनेजमेंट तकनीकें अपनाकर आप अपने बिज़नेस को कस्टमर फ्रेंडली बना सकते हैं।

आज कल ग्रीन इकॉनमी का जमाना है। उपभोक्ता भी ऐसे बिज़नेस से जुड़ने के लिए उत्सुक हैं जो एनवायरनमेंट फ्रेंडली मूल्यों के अनुरूप काम करते हैं। ऐसे में हर व्यवसायी के लिए आवश्यक हो गया है कि वे प्रभावी वेस्ट मैनेजमेंट के तरीक़े अपनाएँ।  प्रभावी तरीक़े वेस्ट कम करने , उपयोगी सामान पुनः इस्तेमाल करने और रीसायकल करने पे ज़ोर देते हैं। वहीं अगर सही तरीके न अपनाए जाएँ तो कचरा भी काफी मात्रा में पैदा होता है और साथ ही कचरा निस्तारण के लिए आपको जेब भी ज़्यादा ढीली करनी पड़ती है। ऐसे में आइये नज़र डालें कुछ ऐसे टिप्स पर जिनसे आप अपनी दुकान-गोदाम का कचरा सही से व्यवस्थित कर पाएंगे।

कैसे करें अपने दुकान-गोदाम का कचरा मैनेज?

कम करें वेस्ट का उत्पादन - वेस्ट मैनेजमेंट में सबसे पहला स्टेप वेस्ट कम करना है। जब आप ज़रूरत से ज़्यादा सामान बनाते, मंगाते या स्टोर करते हैं तो आपकी दुकान के साथ-साथ अपका गोदाम भी भर जाता है। इस स्टॉक को मैनेज करने का कॉस्ट भी ज़्यादा होता है, साथ ही सामान खराब होने का डर भी अधिक होता है। इसलिए सामान ज़रूरत और आर्डर के हिसाब से ही स्टॉक करें। ऐसा करके आप अनावश्यक वेस्ट मैनेज करने से बच सकते हैं।

1. कचरे का हिसाब-किताब है ज़रूरी -

एक सफल वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम बनाने के लिए सबसे पहले आपको अपनी दुकान-गोदाम आदि से उत्पन्न होने वाले कचरे के विषय में समझना होगा। अलग अलग प्रकार के कचरों जैसे सूखे, गीले, केमिकल इत्यादि को अलग कर आपको वर्गीकृत करें। कुछ महत्वपूर्ण स्थान जैसे प्रवेश द्वार, बाथरूम, गोदाम आदि से शुरुआत की जा सकती है। ऐसे आप यह पता कर पाएंगे कि आपकी दुकान के किस एरिया से सबसे ज़्यादा वेस्ट उत्पन्न हो रहा है।

2. दुकान में लगवाएं डस्टबिन -

अपनी दुकान, गोदाम आदि में अलग-अलग कचरों (सूखा कचरा, गीला कचरा, रीसायकल करने योग्य कचरा, कम्पोस्ट करने योग्य कचरा आदि) के लिए अलग-अलग डस्टबिन लगवाएं, ताकि आपके बिज़नेस से सम्बंधित लोग अपना कचरा यहाँ-वहाँ  फेंकने की बजाय डस्टबिन में ही डालें। इन डस्टबिनों पर आप कुछ चिन्ह बनवाएं जिनसे लोगों को यह पता लग सके कि कौन से डस्टबिन में कैसा कचरा डालना है।

3. अपनी कचरा निस्तारण के तरीकों का पुनः मूलयांकन करें -

स्वाभाविक है कि बड़ी दुकानें ज़्यादा कचरा उत्पन्न करती हैं। ऐसे में उन्हें कचरा ले जाने वाली गाड़ियों की ज़रूरत पड़ती है। कई कचरा ले जाने वाले रीसाइक्लिंग की सुविधा भी देते हैं।आप पहले ऐसे ही कचरे वालों से संपर्क करें। अगर आपकी दुकान किसी और की प्रॉपर्टी पर है, तो पहले से ही कचरा प्रबंधन के तरीकों से सम्बंधित जानकारी मालिक से ले लें। कचरा पिकअप पॉइटंस की जानकारी रखें।

4. सुनिश्चित करें सबकी सहभागिता -

एक सफल वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम में आपके कर्मचारियों, ग्राहकों ,आगंतुकों आदि की सहभागिता पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसलिए इन सभी को आपके वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में जानकारी होनी चाहिए। आप अपनी दुकान में इससे सम्बंधित घोषणा करवा  सकते हैं, साथ ही पोस्टर आदि भी लगवा सकते हैं।

5. बनाएं एक ग्रीन टीम -

आपकी ग्रीन टीम में कुछ ऐसे लोगों को रखें जो ग्राहकों, कर्मचारियों आदि को बिज़नेस में पर्यावरण के अनुकूल सतत आचरण स्थापित करने और बढ़ावा देने के लिए  शिक्षित, सशक्त और प्रेरित करें।

6. बदलें अपने काम काज के तरीके -

कचरा उत्पादन कम करने की प्रक्रिया छोटी-छोटी चीज़ों में बदलाव लाकर शुरू की जा सकती है :-

  • फालतू के ईमेल, रसीदें आदि देने और प्रिंट करने से बचें। एसएमएस के विकल्प को प्राथमिकता दें।
  • सामान पुनः उपयोग करने योग्य कंटेनर में बेचें।
  • प्रचार-प्रसार सामग्री अपनी वितरण सूची के हिसाब से ही प्रकाशित कराएं।
  • कस्टमर को समान बेचते समय अपनी ओर से कम से कम पैकेजिंग करें। आप इसके लिए कस्टमर से खुद अपना बैग इत्यादि लाने के लिए कह सकते हैं।
  • अपने स्टाफ और विक्रेताओं के साथ मिलकर डिस्पोजेबल पैकेज और अन्य संभावित कचरे को अपनी दुकान से दूर रखें।

वेस्ट मैनेजमेंट के क्या हैं फायदे?

  • अपने दुकान के कचरे को रीसायकल करके आप आप अपनी निस्तारण लागत कम कर सकते हैं।
  • आपकी दुकान से कितना और किस प्रकार का कचरा निकलता है, यह जानकार आप बेहतर समझ पाएंगे की आपकी दुकान के लिए किस प्रकार की वेस्ट मैनेजमेंट सर्विस ठीक रहेगी। बेहतर जानकारी के साथ आप सही दामों पर सही निर्णय ले सकते हैं।
  • कचरा, पानी और ऊर्जा का कुशल प्रबंधन आपके बिज़नेस को बूस्ट कर के आपकी इमेज को बेहतर करता है।
  • कुशल वेस्ट मैनेजमेंट तरीके अपनाकर ग्रीनहॉउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सकता है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कम किया जा सकता है।

दें सरकार का साथ -

नगर निगम की ओर से दुकानों के लिए दो तरह के डस्टबिन दिए जाते हैं। यह डस्टबिन हरे और नीले रंग के होते हैं। हरे रंग का डस्टबिन गीले कचरे के लिए और नीले रंग का डस्टबिन सूखे कचरे के लिए होता है। केंद्र सरकार के इस अभियान में हर दरवाज़े पर जाकर कचरा उठाया जाता है। इस कचरे से बिजली, कम्पोस्ट आदि बनाने का कार्य किया जा सकता है। आप सरकार द्वारे दिए गए निर्देशों का पालन करें और धरती को स्वच्छ बनाने में उनका सहयोग करें।

ध्यान रखें -

आज दुकानदारों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ई-कॉमर्स क्रांति के चलते कई दुकानें बंद हुई हैं। ऐसी नयी दुनिया में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए, अब दुकानदारों को कुछ नया सोचना होगा। ऐसी टेक्नोलॉजी अपनानी होंगी जिनसे उनकी लागत में कमी आए। इसमें एक ज़रूरी फैक्टर  वेस्ट मैनेजमेंट भी है। एक दुकानदार जो लम्बे समय तक सफल रहना चाहता है, उसके लिए अपने वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम में सुधार की संभावनाएं तलाशना बेहद ज़रूरी है।

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