
2026 में ऑनलाइन सामान बेचने के चार रास्ते हैं: मार्केटप्लेस सेलर अकाउंट, अपनी वेबसाइट, सोशल कैटलॉग और ONDC नेटवर्क। Amazon.in और Flipkart पर रजिस्ट्रेशन या मासिक फीस शून्य है, पैसा हर ऑर्डर पर कटता है, और Flipkart अपने फीस पेज पर ₹1,000 से सस्ते हर प्रोडक्ट पर 0% कमीशन बताता है। शुरू करने के लिए PAN, बैंक खाता, पिकअप पता और ज्यादातर कैटेगरी में GSTIN चाहिए।
एक पुरानी लाइन आज भी कई जगह छपी मिलती है कि भारत की 40% खरीदारी ऑनलाइन होती है। यह न तब सही थी, न अब। IBEF की मई 2026 रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में भारत की ऑनलाइन रिटेल बिक्री करीब 80 अरब डॉलर रही और सालाना 21% बढ़ी, लेकिन कुल रिटेल में ऑनलाइन का हिस्सा अब भी दहाई अंक से नीचे है। छोटे सेलर के लिए असली खबर इसमें छिपी है: उसी रिपोर्ट के अनुसार देश में 29 से 30 करोड़ ऑनलाइन खरीदार हैं और नए ऑर्डर की करीब आधी बढ़त टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आ रही है।
ऑनलाइन सामान बेचने के लिए कौन-कौन से रास्ते हैं?
चार रास्ते खुले हैं, और चारों में पैसा अलग-अलग रास्ते से आपके खाते तक पहुँचता है।
मार्केटप्लेस सेलर अकाउंट। Amazon, Flipkart और Meesho, तीनों पर 2026 में कोई भी खुद जाकर सेलर अकाउंट खोल सकता है। Amazon का Seller ऐप Play Store पर मौजूद है, रजिस्ट्रेशन से लेकर ऑर्डर और स्टॉक तक सब उसी ऐप से चलता है, और यह हिंदी समेत 8 भारतीय भाषाओं में है। Flipkart का Seller Hub अपने पेज पर 14 लाख से ज्यादा सेलर और 19,000 से ज्यादा पिन कोड कवरेज बताता है। Meesho पर सप्लायर बनने का रास्ता supplier.meesho.com से जाता है और कंपनी की अपनी साइट कहती है कि प्रोडक्ट लिस्ट करने पर सप्लायर से कोई कमीशन नहीं लिया जाता। Myntra इस लिस्ट से अब बाहर है: उसका ऑनबोर्डिंग लॉगिन वाले पार्टनर पोर्टल से होता है, यानी वह ब्रांड और स्थापित बिजनेस का रास्ता है, पहली बार बेचने वाले का नहीं।
अपनी वेबसाइट। Shopify जैसे स्टोर बिल्डर पर दुकान आप खुद खड़ी कर सकते हैं, पर ट्रैफिक आपको खुद लाना पड़ता है। खर्च तय और महीनेवार होता है, जिसका पूरा हिसाब अगले सेक्शन की टेबल में है।
सोशल कैटलॉग। WhatsApp Business ऐप में प्रोडक्ट कैटलॉग, ऑर्डर और पेमेंट का इंतजाम अंदर ही है, और Instagram तथा Facebook कैटलॉग Meta Business Suite से चलते हैं। JioMart तो अपना ग्रॉसरी ऑर्डर WhatsApp के भीतर ही लेता है। लोकल ग्राहक और पहले से बने भरोसे पर टिके धंधे के लिए यह सबसे सस्ता शुरुआती रास्ता है।
ONDC। 2021 में यह विकल्प था ही नहीं। ONDC की अपनी साइट (अगस्त 2026 में अपडेटेड) 50 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन और 300 से ज्यादा नेटवर्क पार्टिसिपेंट बताती है; दिसंबर 2025 तक 630 से ज्यादा शहरों के 1.16 लाख से अधिक रिटेल सेलर जुड़ चुके थे। फरवरी 2026 में ONDC ने MSME और कारीगरों के लिए वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स को लेकर India Post के साथ करार किया। यहाँ आप किसी एक कंपनी के पोर्टल पर नहीं, नेटवर्क के किसी सेलर ऐप के जरिए जुड़ते हैं।
पैसा किसके पास पहले जाता है, यह फर्क समझ लीजिए। मार्केटप्लेस पर ग्राहक का पैसा पहले प्लेटफॉर्म के पास जाता है और सेटलमेंट साइकिल पर आपके बैंक खाते में आता है। Amazon रजिस्ट्रेशन के 14 दिन बाद पहला सेटलमेंट करता है, फिर करीब हर 7 दिन पर, और बैंक तक पहुँचने में 2 से 3 कामकाजी दिन और लगते हैं। Flipkart अपने अलग-अलग पेजों पर डिस्पैच के 3 दिन और 7 दिन दोनों लिखता है, यानी व्यवहार में इसे सेलर टियर पर निर्भर 3 से 7 दिन का रेंज मानकर चलिए। अपनी वेबसाइट पर पैसा सीधे आपके पेमेंट गेटवे से आता है, बीच में कोई मार्केटप्लेस नहीं होता।
मार्केटप्लेस पर बेचूँ या अपनी वेबसाइट बनाऊँ, किसमें फायदा है?
फर्क की जड़ एक ही है: मार्केटप्लेस पर फिक्स्ड खर्च शून्य और प्रति ऑर्डर खर्च ज्यादा है, अपनी वेबसाइट पर उल्टा।
| मार्केटप्लेस (Amazon/Flipkart) | अपनी वेबसाइट (Shopify) | |
|---|---|---|
| रजिस्ट्रेशन फीस | शून्य (2026) | डोमेन का खर्च अलग |
| मासिक खर्च | कोई सब्सक्रिप्शन नहीं | पहले 3 महीने ₹20/माह, फिर Basic ₹1,499/माह (सालाना बिलिंग), Grow ₹5,599, Advanced ₹22,680 (2026) |
| प्रति बिक्री खर्च | रेफरल/कमीशन + फिक्स्ड फीस + शिपिंग | Shopify Payments न लेने पर प्लान के हिसाब से 2%, 1% या 0.6% ट्रांजैक्शन फीस, साथ में गेटवे चार्ज |
| ग्राहक कौन लाता है | प्लेटफॉर्म का अपना ट्रैफिक | पूरी जिम्मेदारी आपकी |
| कीमत और ब्रांडिंग पर कंट्रोल | सीमित, प्लेटफॉर्म के नियम चलते हैं | पूरा आपका |
| रिटर्न का बोझ | प्लेटफॉर्म की रिटर्न पॉलिसी माननी पड़ती है | नियम आप बनाते हैं, झंझट भी आपका |
इसका सीधा मतलब यह है कि ₹300 से ₹1,000 के बीच के आम प्रोडक्ट, जहाँ मार्जिन पतला है और ब्रांड अभी बना नहीं, मार्केटप्लेस पर ही ठीक बैठते हैं। जहाँ मार्जिन मोटा है और डिजाइन आपका अपना है, जैसे हाथ से बनी आर्टिफिशियल ज्वेलरी, वहाँ अपनी साइट का मासिक खर्च निकल आता है और रिपीट ग्राहक भी आपका रहता है।
ज्यादातर टिकाऊ सेलर दोनों साथ चलाते हैं। मार्केटप्लेस से ऑर्डर वॉल्यूम और रिव्यू आते हैं, अपनी साइट और WhatsApp से रिपीट ग्राहक। Amazon इसमें बाधा नहीं डालता, उल्टे Multi-Channel Fulfilment बेचता है, जिससे आपकी अपनी वेबसाइट या दूसरे चैनल के ऑर्डर भी उसके गोदाम से निकल सकते हैं।
ऑनलाइन सेलर बनने के लिए कौन-से डॉक्यूमेंट और रजिस्ट्रेशन चाहिए?
बुनियादी सेट छोटा है: PAN, चालू बैंक खाता, पता प्रमाण और एक पिकअप पता। Amazon की सेलर रजिस्ट्रेशन गाइड के मुताबिक पिकअप पता उसी राज्य का होना चाहिए जिसमें आपका GST रजिस्ट्रेशन है।
GST वाला हिस्सा 2021 के बाद बदल चुका है। पहले सीधा नियम था कि ई-कॉमर्स से बेचने वाले हर सप्लायर को GST रजिस्ट्रेशन लेना ही होगा। 1 अक्टूबर 2023 से लागू Notification 34/2023-Central Tax के बाद वह पूरी तरह सही नहीं रहा: जो सामान बेचने वाला छोटा कारोबारी सिर्फ अपने ही राज्य के अंदर ई-कॉमर्स ऑपरेटर के जरिए सप्लाई करता है और ₹40 लाख (विशेष श्रेणी राज्यों में ₹20 लाख) की सीमा से नीचे है, वह पूरे GSTIN की जगह पोर्टल पर बने एनरोलमेंट नंबर पर बेच सकता है।
कानून की छूट और प्लेटफॉर्म की शर्त दो अलग चीजें हैं, यह गड़बड़ी नए सेलर सबसे ज्यादा करते हैं। Amazon.in पर GSTIN माँगा जाता है, सिवाय तब जब आप सिर्फ टैक्स-छूट वाले प्रोडक्ट बेच रहे हों, जैसे किताबें। Flipkart किताबों को छोड़कर हर कैटेगरी में GSTIN माँगता है। यानी बिना GST शुरू करना है तो या तो टैक्स-छूट वाली कैटेगरी चुनिए, या ONDC और सोशल कैटलॉग वाला रास्ता देखिए, या रजिस्ट्रेशन ले लीजिए। अपनी स्थिति अपने CA से एक बार जाँचवा लेना सस्ता पड़ता है।
रेट भी बदल गए हैं। 22 सितंबर 2025 से GST दो दरों का ढाँचा है, 5% मेरिट और 18% स्टैंडर्ड, कुछ गिनी-चुनी वस्तुओं पर 40% की डी-मेरिट दर के साथ। पुरानी 5/12/18/28 वाली सीढ़ी अब चलन में नहीं है, इसलिए लिस्टिंग के टैक्स कोड उसी हिसाब से बैठाइए। बिल कैसा दिखना चाहिए, यह GST इनवॉइस फॉर्मेट और नियम वाली पोस्ट में विस्तार से है, और GST न भरने पर क्या होता है पढ़कर रिटर्न की तारीखों को हल्के में लेना बंद कर दीजिए।
खाने-पीने का सामान बेचना है तो FSSAI का नियम आपके हक में बदला है। FSSAI और स्वास्थ्य मंत्रालय की 13 मार्च 2026 की प्रेस रिलीज के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से बेसिक रजिस्ट्रेशन की टर्नओवर सीमा ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दी गई, स्टेट लाइसेंस ₹50 करोड़ तक कवर करता है, और रजिस्ट्रेशन तथा लाइसेंस अब स्थायी वैधता के साथ आते हैं, हर साल रिन्यू कराने की जरूरत नहीं। नगर निकाय या TVC से रजिस्टर्ड स्ट्रीट वेंडर को रजिस्टर्ड ही माना जाएगा। घर के अचार, मसाले या टिफिन सर्विस वाले धंधे के लिए यह सीधी राहत है। कॉस्मेटिक, इलेक्ट्रॉनिक्स या बच्चों के प्रोडक्ट जैसी कैटेगरी में प्लेटफॉर्म अपनी कैटेगरी गाइडलाइन में अलग मंजूरी माँग सकता है, लिस्टिंग बनाने से पहले वही पेज पढ़ लीजिए।
अकाउंट खोलने से पहला ऑर्डर आने तक की प्रक्रिया क्या है?
रजिस्ट्रेशन से पहले पेमेंट तक का रास्ता पाँच पड़ावों का है, और ज्यादातर नया सेलर तीसरे पर अटकता है।
पहला, अकाउंट। GSTIN या एनरोलमेंट नंबर, PAN, बैंक डिटेल और पिकअप पता डालकर वेरिफिकेशन पूरा कीजिए। Amazon पर यह सब उसके सेलर ऐप से हो जाता है।
दूसरा, कैटलॉग। हर प्रोडक्ट की लिस्टिंग में टाइटल, फोटो, डिस्क्रिप्शन और टैक्स कोड भरना होता है। ब्रांड और बारकोड (GTIN) की जानकारी भी माँगी जाती है; अपना ब्रांड है तो प्लेटफॉर्म की ब्रांड अप्रूवल प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जिसमें कुछ दिन लगते हैं। फोटो और टाइटल के नियम हर प्लेटफॉर्म पर अलग हैं, इसलिए दस लिस्टिंग बनाने से पहले उसकी इमेज गाइडलाइन का पेज एक बार पढ़ लेना पूरे दिन की मेहनत बचाता है।
तीसरा, कीमत और शिपिंग। कीमत तय करने से पहले पूरी फीस जोड़िए, हिसाब अगले सेक्शन में है। यहीं तय होता है कि आप खुद कूरियर करेंगे, प्लेटफॉर्म से पिकअप कराएँगे, या माल पहले से उसके गोदाम में रखेंगे।
चौथा, ऑर्डर। ऑर्डर आते ही पैनल पर कन्फर्म कीजिए, दिए गए फॉर्मेट में इनवॉइस और शिपिंग लेबल निकालिए, पैक कीजिए और तय समय पर पिकअप के लिए तैयार रखिए। तय समय चूकना सबसे तेज तरीका है अपनी सेलर रेटिंग गिराने का।
पाँचवाँ, पैसा। डिलीवरी के बाद सेटलमेंट साइकिल पर पेमेंट आता है। Amazon पर पहला सेटलमेंट रजिस्ट्रेशन के 14 दिन बाद और उसके बाद करीब हर 7 दिन पर होता है, बैंक में पहुँचने में 2 से 3 कामकाजी दिन और लगते हैं। Flipkart पर यह डिस्पैच से 3 से 7 दिन के बीच, सेलर टियर के हिसाब से। पहले महीने का प्लान इसी देरी को मानकर बनाइए।
ऑनलाइन बेचने में असल में कितना खर्च होता है?
सबसे बड़ा बदलाव यही है कि सस्ते प्रोडक्ट पर कमीशन लगभग खत्म हो चुका है। Flipkart अपने फीस और कमीशन पेज पर ₹1,000 से नीचे के हर प्रोडक्ट पर 0% कमीशन और पूरी फैशन कैटेगरी पर 0% कमीशन बताता है। Amazon.in की रेफरल फीस कैटेगरी के हिसाब से 0% से 30% तक जाती है, कई कैटेगरी में ₹1,000 तक के आइटम पर 0% है, और उसका पेज 1,800 से ज्यादा कैटेगरी में 70% तक फीस बचत का दावा करता है। यानी ₹1,000 से नीचे बेचने वाले का असली खर्च कमीशन नहीं, शिपिंग और फिक्स्ड फीस है।
बाकी लाइनें, जो 2026 में लागू हैं:
फिक्स्ड या क्लोजिंग फीस हर ऑर्डर पर लगती है। Amazon पर सेल्फ-शिप और Easy Ship में यह ₹1 से शुरू होती है। Flipkart पर यह सेलर टियर से बदलती है, प्लैटिनम सेलर को बेस रेट से ₹30 तक कम, और ब्रॉन्ज सेलर को बेस रेट से ₹10 ज्यादा। शिपिंग Amazon पर करीब ₹37 प्रति आइटम से शुरू होकर वजन, साइज और दूरी के साथ बढ़ती है। TCS की कटौती अब बिक्री के 0.5% पर है (0.25% CGST + 0.25% SGST, या 0.5% IGST), प्लेटफॉर्म इसे GSTR-8 में दिखाता है और आप GSTR-3B में वापस क्लेम करते हैं। पुराने लेखों में यह दर 1% लिखी मिलेगी, वह अब पुरानी है। अपनी वेबसाइट पर यही जगह पेमेंट गेटवे चार्ज और Shopify की मासिक फीस लेती है।
एक उदाहरण से हिसाब साफ हो जाएगा। मान लीजिए ₹749 का एक प्रोडक्ट है, जिसकी लागत आपको ₹380 पड़ती है, और वह उस कैटेगरी में है जहाँ ₹1,000 से नीचे रेफरल फीस 0% है।
| लाइन | रकम (2026) |
|---|---|
| बिक्री कीमत | ₹749 |
| माल की लागत | ₹380 |
| रेफरल/कमीशन | ₹0 |
| क्लोजिंग फीस | ₹1 से ऊपर |
| शिपिंग | करीब ₹37 से ऊपर |
| पैकिंग सामग्री (अपना अनुमान) | ₹10 से ₹20 |
| बचा | करीब ₹310 से ₹320 |
यह ₹310 अभी टैक्स से पहले का है और सबसे बड़ी बात, रिटर्न से पहले का है। इसी प्रोडक्ट पर हर पाँचवाँ ऑर्डर वापस आया तो वापसी की ढुलाई और खराब हुए पैकिंग-सामान का खर्च इसी मार्जिन में से जाता है। रिटर्न और RTO की कोई छपी हुई दर तालिका नहीं है, इसलिए अंदाजा मत लगाइए, अपने अकाउंट का रेट कार्ड खोलकर अपनी कैटेगरी का असली आँकड़ा देखिए। रेट कार्ड बदलते भी रहते हैं; Amazon के अपने फीस पेज पर ऑटोमोटिव कैटेगरी का एक बदलाव 10 जून 2026 से लागू दिख रहा है।
ऑनलाइन ऑर्डर की शिपिंग और पेमेंट का इंतजाम कैसे करें?
तीन तरीके हैं और तीनों का गणित अलग है। सेल्फ-शिप में आप अपना कूरियर चुनते हैं, दर पर मोलभाव कर सकते हैं, पर देरी और शिकायत आपके सिर। प्लेटफॉर्म पिकअप (Amazon Easy Ship जैसा) में पैकिंग और लेबल आपका, उठाना और पहुँचाना प्लेटफॉर्म का। फुलफिलमेंट (FBA या Fulfilment by Flipkart) में माल पहले से गोदाम में रहता है, डिलीवरी सबसे तेज होती है और स्टोरेज तथा फुलफिलमेंट फीस चलती रहती है, इसलिए यह उसी प्रोडक्ट पर बैठता है जो लगातार बिकता हो।
पिन कोड कवरेज देख लीजिए, क्योंकि जितनी दूर तक पहुँच, उतना बड़ा बाजार। Flipkart अपने सेलर पेज पर 19,000 से ज्यादा पिन कोड बताता है। वजन और डाइमेंशन सीधे शिपिंग फीस तय करते हैं, इसलिए हल्का और कसकर पैक होने वाला प्रोडक्ट शुरुआत में सबसे कम जोखिम का रहता है।
पेमेंट में प्रीपेड अब डिफॉल्ट है। IBEF के मुताबिक भारत के रिटेल पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 81% अकेले UPI से होता है। Pay on Delivery अब भी चलता है, जिसमें डिलीवरी वाला ग्राहक से पैसा लेता है और वह सामान्य सेटलमेंट साइकिल पर आपके बैंक खाते में आता है। COD का नुकसान दो तरफा है: पैसा देर से मिलता है और ऑर्डर लौटने की गुंजाइश ज्यादा रहती है, जिसमें दोनों तरफ की ढुलाई आपकी जेब से जाती है। शुरू में प्रीपेड ऑर्डर पर छोटी छूट देकर उस आदत को बढ़ावा देना अक्सर सस्ता पड़ता है।
रिटर्न आपकी जिम्मेदारी रहती है। Amazon के सेलर ब्लॉग के अनुसार रिटर्न को सेलर अधिकृत करता है, माल आने पर जाँचता है और रिफंड जारी करता है; रिफंड ग्राहक तक पहुँचने में 3 से 5 कामकाजी दिन लगते हैं, और वापसी की ढुलाई Easy Ship को सौंपी जा सकती है।
बिना बड़े विज्ञापन बजट के पहले 100 ऑर्डर कैसे लाएँ?
पहले 100 ऑर्डर विज्ञापन से नहीं, लिस्टिंग और मौजूदा ग्राहकों से आते हैं। मार्केटप्लेस के भीतर की सर्च ही आपका पहला चैनल है: टाइटल में वही शब्द रखिए जो ग्राहक टाइप करता है, हर प्रोडक्ट की साफ रोशनी में कई एंगल से फोटो लगाइए, और साइज, मटीरियल तथा वारंटी जैसे सवाल डिस्क्रिप्शन में ही निपटा दीजिए। शुरुआती रिव्यू सबसे कीमती चीज हैं, इसलिए पहले महीने में डिलीवरी समय और पैकिंग पर उतना ही ध्यान दीजिए जितना कीमत पर।
समानांतर में अपना WhatsApp Business कैटलॉग बनाइए और मोहल्ले के पुराने ग्राहकों को वही लिंक भेजिए, वे पहले ऑर्डर सबसे तेज देते हैं। Instagram और Facebook पर कैटलॉग Meta Business Suite से जुड़ता है; प्रोडक्ट बनते हुए दिखाने वाली छोटी रील नए सेलर के लिए सबसे सस्ता कंटेंट है, और ग्राहक की भेजी फोटो उससे भी बेहतर। मार्केटप्लेस के भीतर के ऐड और डिस्काउंट टूल तब चालू कीजिए जब आपको अपना नेट मार्जिन ठीक-ठीक पता हो, वरना बिक्री बढ़ेगी और कमाई घटेगी। प्रचार का पूरा ढाँचा अपने बिजनेस की मार्केटिंग कैसे करें में देखिए।
एक बात याद रखिए: टियर-2 और छोटे शहरों से आने वाला ग्राहक अब बड़ा हिस्सा है, IBEF की मई 2026 रिपोर्ट के मुताबिक गर्मियों की सेल के 38% ऑर्डर वहीं से आए। यानी हिंदी में लिखे टाइटल और लोकल भाषा में जवाब देना दिखावा नहीं, बिक्री का जरिया है।
नए ऑनलाइन सेलर कहाँ पैसा गँवाते हैं?
सबसे आम चूक कीमत तय करने में होती है। लोग खरीद और बिक्री का अंतर देखकर खुश हो जाते हैं और शिपिंग, क्लोजिंग फीस, पैकिंग तथा रिटर्न जोड़ना भूल जाते हैं। ऊपर वाली टेबल को अपने हर प्रोडक्ट पर एक बार लगाकर देखिए, कई लिस्टिंग वहीं छँट जाएँगी।
दूसरी चूक स्टॉक की है। जो माल आपके पास नहीं है, उसकी लिस्टिंग चालू छोड़ना ऑर्डर कैंसिल कराता है, और कैंसिलेशन सीधे आपकी सेलर मेट्रिक पर चोट करता है। दो या तीन प्लेटफॉर्म पर एक ही स्टॉक बेचते समय यह खतरा दोगुना हो जाता है, इसलिए दिन में एक तय समय पर स्टॉक मिलाने की आदत बनाइए। एक ही सामान कई जगह बेचने पर रोक नहीं है, दिक्कत सिर्फ तालमेल की है।
तीसरी, कैटेगरी का चुनाव। कपड़े और फुटवियर में साइज की वजह से रिटर्न ऊँचे रहते हैं; नए सेलर के लिए ऐसा प्रोडक्ट आसान रहता है जिसमें साइज की गुंजाइश कम हो। चौथी, रेटिंग को हल्के में लेना: देर से भेजे गए ऑर्डर, अधूरी पैकिंग और अनसुने मैसेज मिलकर अकाउंट की सेहत गिराते हैं, और गिरी हुई मेट्रिक वाले सेलर को सर्च में जगह मिलनी बंद हो जाती है।
पाँचवीं और सबसे चुपचाप नुकसान करने वाली, हिसाब-किताब अलग न रखना। ऑनलाइन का पैसा 7 दिन बाद आता है, लोकल ग्राहक का उधार महीने बाद, और घर का खर्च उसी खाते से चलता है, तो महीने के अंत में यह पता ही नहीं चलता कि कमाया कितना। दुकान के उधार का हिसाब रखने के लिए OkCredit जैसा मुफ्त डिजिटल खाता ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं, हर एंट्री का SMS ग्राहक को भी चला जाता है। मार्केटप्लेस का सेटलमेंट स्टेटमेंट हर हफ्ते डाउनलोड करके अलग रखिए, यही आपकी असली कमाई का रिकॉर्ड है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या GST के बिना ऑनलाइन सामान बेच सकते हैं?
कानूनन हाँ, एक सीमित रास्ते में। 1 अक्टूबर 2023 से लागू Notification 34/2023-Central Tax के तहत सिर्फ अपने ही राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के जरिए बेचने वाला और ₹40 लाख (विशेष श्रेणी राज्यों में ₹20 लाख) से नीचे का सामान-विक्रेता GSTIN की जगह एनरोलमेंट नंबर पर बेच सकता है। लेकिन प्लेटफॉर्म की अपनी शर्त अलग है: Amazon.in टैक्स-छूट वाले प्रोडक्ट के अलावा GSTIN माँगता है और Flipkart किताबों को छोड़कर हर कैटेगरी में। अपने मामले में CA से पुष्टि कर लीजिए।
ऑनलाइन बेचने पर पैसा कितने दिन में मिलता है?
Amazon पर पहला सेटलमेंट रजिस्ट्रेशन के 14 दिन बाद और उसके बाद करीब हर 7 दिन पर होता है, बैंक तक पहुँचने में 2 से 3 कामकाजी दिन और लगते हैं। Flipkart अपने पेजों पर डिस्पैच से 3 दिन और 7 दिन दोनों बताता है, यानी सेलर टियर के हिसाब से 3 से 7 दिन मानकर चलिए (2026)।
क्या घर के पते से सेलर रजिस्ट्रेशन हो सकता है?
रजिस्ट्रेशन में एक पिकअप पता चाहिए, अलग दुकान होना अनिवार्य शर्त के तौर पर नहीं लिखा है। Amazon की सेलर गाइड के अनुसार शर्त यह है कि पिकअप पता उसी राज्य का हो जिसमें आपका GST रजिस्ट्रेशन है, और उसी पते से कूरियर उठाना संभव हो।
एक साथ कई प्लेटफॉर्म पर बेचना सही है या नहीं?
सही है, बड़े मार्केटप्लेस एक्सक्लूसिविटी नहीं माँगते, और Amazon तो Multi-Channel Fulfilment के जरिए दूसरे चैनल के ऑर्डर भी अपने गोदाम से भेजने की सुविधा बेचता है। असली चुनौती स्टॉक का तालमेल और हर प्लेटफॉर्म की फीस के हिसाब से अलग कीमत रखना है।
शुरू करने के लिए कम से कम कितनी पूँजी चाहिए?
कोई तय न्यूनतम नहीं है। Amazon.in और Flipkart पर 2026 में रजिस्ट्रेशन और मासिक सब्सक्रिप्शन फीस शून्य है, यानी पूँजी पूरी की पूरी स्टॉक, पैकिंग सामग्री और शुरुआती शिपिंग में जाती है। अपनी वेबसाइट बनानी है तो Shopify पर पहले 3 महीने ₹20 प्रति माह और उसके बाद Basic प्लान ₹1,499 प्रति माह (सालाना बिलिंग) का पक्का खर्च जुड़ जाता है, साथ में डोमेन और पेमेंट गेटवे।