हार्डवेयर की दुकान कैसे खोलें?

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हार्डवेयर की दुकान कैसे खोलें?

लागत, मुनाफा, सही जगह का चुनाव और अन्य जानकारियां

मकान, दुकान बनाना हो, खेती-किसानी करनी हो, प्रधानमंत्री आवास की इमारतें बनानी हों, सरकारी योजना के तहत शौचालय बनाने हों अथवा मशीनरी से जुड़ा कोई भी कार्य करना हो, उसके लिए हार्डवेयर के सामान होना जरूरी है। आज देश के कोने-कोने में हार्डवेयर के सामान की डिमांड है। हार्ड वेयर की दुकान की शुरूआत कैसे की जाये। इसके लिए क्या-क्या चाहिये। कितनी कीमत आयेगी और कितना मुनाफा मिलेगा। यह महत्वपूर्ण सवाल हार्डवेयर की दुकान खोलने वाले के समक्ष बहुत बड़ी समस्या बनकर आते हैं। इन सवालों के जवाब के बारे में सबसे पहले तो यह जानते हैं कि किसी काम या बिजनेस शुरू करने से पहले हमें उसके लिए जरूरी सरकारी कागजात बनवाने चाहिये। जैस हार्डवेयर की दुकान के लिए कॉमर्स या सेल्स डिपार्टमेंट से परमिट लेना अच्छा होता है। इसके अलावा आपको अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कराना बेहतर रहेगा। साथ ही आपको अपनी फर्म का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। उसके बाद आपको जीएसटी नंबर यानी टिन नंबर मिलेगा। इससे आपको अपना बिजनेस चलाने में कभी भी सरकारी प्रॉब्लम नहीं होगी। आपके पेपर वर्क कम्पलीट करने के लिए हार्डवेयर की दुकान यदि अपनी है तो उस जमीन के कागजात और यदि दुकान किराये पर है तो उसका किरायानामा बनवाना जरूरी है। इन कागजातों केसाथ ही आप बिजनेस शुरू करने के लिए तैयार हैं।

पढ़ाई लिखाई की जरूरत नहीं होती

हार्डवेयर की दुकान करने के लिए लम्बी चौड़ी पढ़ाई या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं  होती बल्कि अनुभव की आवश्यकता पड़ता है। बेहतर हो कि यदि आपके परिचय में कोई हार्डवेयर की दुकान का दुकानदार है तो थोड़े दिनों के लिए अपनी मुफ्ता सेवाएं दे दें और उसके बदले में आप दुकान चलाने के गुर सीख लें। इस बीच आपको हार्डवेयर के सारे सामान की जानकारी हो जायेगी और साथ ही हार्डवेयर का थोक सामान कहां से मिलेगा। इसकी भी जानकारी हो जायेगी। जब आपको यह महसूस हो कि आप हार्डवेयर की दुकान के बारे में सारी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर चुके हैं तो आप अपनी दुकान डालने के बारे में सोच सकते हैं। इसके बाद दुकान किस तरह से खोलें इस पर विचार करें।

शहरों, गावों और कस्बों में कहीं भी खोल सकते हैं दुकान

सबसे पहले हमें शहर, गांव, कस्बे के मार्केट के उस हिस्से में दुकान देखनी होगी जहां पर इस तरह की दुकानें हों और सस्ते किराये में हों। इस तरह के एरिया में यदि आपकी स्वयं की जमीन हो तो उस पर दुकान बनवाना बेहतर होगा। हार्डवेयर की दुकान थोड़ी बड़ी लेनी होती है क्योंकि इस तरह की दुकान में हार्डवेयर के आइटम बहुत होते हैं और बहुत जगह भी घेरते हैं। विशेषकर पाइप बहुत लम्बे होते हैं। उसके अलावा बहुत सारे आइटमों को अलग-अलग रखने के लिए भी जगह की जरूरत होती है। बहुत बड़ी दुकान के साथ ही आपको दुकान में विशेष तरह का रैक यानी दुकान में सामान रखने की आलमारी बनवानी होगी। ताकि कम जगह में अधिक से अधिक सामान आ सके। दुकान में हार्डवेयर से जुड़ा प्रत्येक सामान होना चाहिये। क्योंकि एक भी आइटम शार्ट होने से ग्राहक दूसरी दुकान पर चला जायेगा। दुकान तैयार होने के बाद आपको हार्डवेयर का सामान की जरूरत है। इसके लिए आपको थोक बाजार की जानकारी होनी चाहिये। थोक बाजार में बहुत जबर्दस्त कंपटीशन होता है। इससे आपको को थोक बाजार की कई दुकानों की जांच पड़ताल करनी होगी।जहां से आपको सस्ते से सस्ता और अच्छी क्वालिटी वाला माल मिले वहीं से खरीदना चाहिये।

कस्टमर्स डीलिंग हैं सफलता की कुंजी

हार्डवेयर की दुकान खुलने के बाद अपनी बात करने की कला से दुकान पर आने वाले कस्टमर्स को पूर्ण संतुष्ट करना होगा। साथ ही उसे यह अहसास कराना होगा कि इस दुकान से सस्ता और अच्छा हार्डवेयर का सामान कहीं और नहीं मिल सकता है। एक बार संतुष्ट होने के बाद ग्राहक कही और नही जायेगा। साथ ही अपने पास-पड़ोसियों को भी आपकी दुकान पर ही जाने को कहेगा। इस तरह की माउथ पब्लिस्टिी से आपकी दुकान को फायदा होगा। अच्छी क्वालिटी का सामान बेचने से शुरू-शुरू में थोड़ी परेशानी आ सकती है लेकिन एक बार लोगों को पता चल गया कि यहां पर मिलने वाला सामान अच्छी क्वालिटी का होता है तो कस्टमर दूसरी जगह नहीं जायेगा।

कौन-कौन सा सामान रखें

दुकान में हार्डवेयर का कौन-कौन सा सामान रखें, यह जानना भी बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले हम बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में काम आने वाली चीजों की बात करें तो हथौड़ा, छेनी, फावड़ा, तसला, रस्सी, कीलें, नट-बोल्ट, कन्नी-वसूली, प्लम्बर का सारा सामान, पाइप, फिटिंग, नल, हैण्डपम्प का सामान, शौचालय में काम आने वाले सीट, फिटिंग, दरवाजों के कब्जे, चिटकनी, कुंडी, खेती किसानी से जुड़े सामान हल, टयूबवेल के मशीनों के नट-बोल्ट, चक्की, कोल्हू, स्पेलर के नट बोल्ट, पट्टे, चाकू, कैंची, पेचकस, कद्दू कस, लोहे के बर्तन कढ़ाही, तवा, चिमटा , कीलें, स्क्रू, ताला-चाबी, पेंट, ब्रश, तारपीन तेल, वाल पुट्टी सहित उन तमाम सामानों के साथ रस्सी, तिरपाल के अलावा स्थानीय ग्राहकों की डिमांड वाला सामान रखें। इसके अलावा मांग के अनुरूप बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का अन्य जरूरी सामान भी रखें। इससे एक ही जगह पर सारा सामान मिलने से अधिक से अधिक ग्राहक आपकी दुकान पर ही आना चाहेंगे। यदि ऐसी दुकान आसपास नहीं हुई तो उस एरिया में आपकी दुकान की मोनोपोली बन जायेगी।

बिजनेस बढ़ाने के लिए क्या क्या करें

पहली बात आपका व्यवहार और आपके माल की क्वालिटी अच्छी हुई तो कस्टमर खोज कर आपकी दुकान पर आयेगा। इसके बावजूद आपको लगता है कि बिजनेस कम आ रहा और इसे बढ़ाना है तो पहले आप पोस्टर शहरों की मुख्य गलियों व बाजारों में लगवायें। इसे अलावा जिस क्षेत्र में बिल्डिंगों का निर्माण हो रहा है उस क्षेत्र का भ्रमण करके वहां के ठेकेदार से सम्पर्क बनायें। इसके अलावा शहर के मिस्त्रियों, प्लम्बरों, बिल्डिंग ठेकेदारों व पेंटिंग के ठेकेदारों से सम्पर्क बनायें। इससे वो आपके माल की बिक्री को बढ़ायेंगे। इसके अलावा आप इन काम करने वाले ठेकेदारों, मिस्त्रियों को कुछ कमीशन का लालच दे सकते हैं। उससे आपको अधिक कस्टमर मिल जायेंगे और आपका बिजनेस भी बढ़ जायेगा। बिजनेस बढ़ने से मुनाफा अपने आप ही बढ़ जायेगा।

कितनी लागत आयेगी, जानिये

अब हार्डवेयर की दुकान खोलने के लिए कितनी लागत आयेगी। इस बारे में कोई फिक्स लागत नहीं है बल्कि आप अपनी सुविधा और अपने बजट में भी यह बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा इस तरह की दुकान शुरू करने की लागत शहर, गांव और कस्बे के हिसाब से तय होती है। क्योंकि हार्डवेयर के लिए जो दुकान चाहिये उसकी लागत शहर, गांव और कस्बे के हिसाब से अलग-अलग होगी। इसके अलावा शहर, गांव और कस्बे को देखते हुए हार्डवेयर की दुकान में स्टोर करना होगा। गांव में दुकान होने पर आपको ज्यादा स्टोर करना होगा क्योंकि डिमांड के समय दूर शहरों में स्थित थोक बाजार तक रोजाना भागदौड़ करना महंगा पड़ेगा। शहर में दुकान होने के वजह से आपको कम स्टॉक से भी काम चल जायेगा। इसके बावजूद यदि किसी शहर में आप दुकान खोलते हैं तो किराये की दुकान समेत आपको 4-5 लाख रुपये तो लगाने ही पड़ेंगे। यदि दुकान अपनी हुई तो भी आपको तीन लाख रुपये तक इन्वेस्ट करने ही होंगे।

कितना मुनाफा मिल सकता है

यह तो सभी जानते हैं कि जितना गुड़ डाला जाये मीठा उतना होता है। जितना मीठा होता है, उतना ही फायदा भी होता । कहने का मतलब यह है कि आपको मुनाफा कितना मिल सकता है। हार्डवेयर की दुकान जितनी बड़ी होगी, जितने ज्यादा आइटम होगें,उतनी ही ज्यादा बिक्री होगी।जब बिक्री ज्यादा होगी तो मुनाफा भी ज्यादा होगा।यहतो हुई हार्ड वेयर की दुकान में रखे सामान की क्वान्टिटी की। अब दूसरी बात करते हैं, वो यह है कि आपकी स्किल पर मुनाफा काफी हद तक निर्भर करता है। यदि आप अपने कस्टमर्स का विश्वास जीत सकते हैं तो वो आपकी बात मानेगा और आप उससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं लेकिन कंपटीशन के जमाने में एकदम से मुनाफे के बारे में सोचना सही नहीं है। इसके लिए आपको दाल में नमक बराबर मुनाफा लेना होगा।इससे आपकी दुकान सोने के अंडे देने वाली मुर्गी के समान साबित होगी। इसका दूसरा पहलू यह है कि यदि आपने मुर्गी का पेट फाड़ने की कोशिश की यानी दाल में नमक की जगह पर नमक में दाल बनाने की कोशिश की तो काठ की हांडी की तरह आपका एक बार तो काम बनजायेगा। लेकिन दूसरी बार कस्टमर्स वहां जायेगा जहां आपसे कम मुनाफे वाला दुकानदार होगा। इसलिये हार्डवेयर के काम में थोड़ा पेशेंस रखना होगा और एक सीमित दायरे में मुनाफा कमाना होगा। वैसे हार्डवेयर से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि हार्डवेयर के कुछ ऐसे आईटम हें उन पर केवल खर्चा निकाल कर 5 प्रतिशत ही मुनाफा मिल सकता है। दूसरी ओर कुछ ऐसे भी आईटम हैं जिन पर एक्सपर्ट की राय के अनुसार 20-25 प्रतिशत तक का मुनाफा कमाया जा सकता है। ये सारी बातें दुकान की एरिया और कंपटीशन पर डिपेंड करतीं हैं।

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