
दवा का होलसेल शुरू करने के लिए राज्य के ड्रग कंट्रोल विभाग से होलसेल ड्रग लाइसेंस चाहिए। आवेदन Form 19 पर ONDLS पोर्टल से होता है और सरकारी फीस ₹1,500 है (Drugs Rules, 1945, Rule 59(2), 2026)। दुकान कम से कम 10 वर्ग मीटर हो, और एक competent person रखना ज़रूरी है। रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट होना अनिवार्य नहीं।
दवा का होलसेल कारोबार असल में करता क्या है?
होलसेलर वह कड़ी है जो कंपनी या उसके C&F एजेंट से माल उठाकर रिटेल केमिस्ट, क्लिनिक और अस्पताल तक पहुंचाता है, और कानून में उसकी पहचान उसके लाइसेंस फॉर्म से होती है: होलसेल के लिए Form 20B और 21B, रिटेल के लिए Form 20 और 21 (Drugs Rules, 1945, Rule 61)।
चेन इस क्रम में चलती है: कंपनी, C&F एजेंट, सुपर स्टॉकिस्ट, स्टॉकिस्ट या डिस्ट्रीब्यूटर, फिर रिटेल केमिस्ट। ट्रेड में ये नाम रोज़ बोले जाते हैं, पर कानून में इनकी अलग-अलग परिभाषा नहीं है। DPCO 2013 में सिर्फ 'dealer' है, यानी वह व्यक्ति जो दवा की खरीद-बिक्री का धंधा करता है, चाहे होलसेल में या रिटेल में, और उससे अलग 'retailer'। इसलिए आपकी असली पहचान वही है जो आपके लाइसेंस पर छपा है।
आम किराना या कपड़े के होलसेल से यह धंधा दो बातों में अलग है। पहला, हर कदम लाइसेंस से बंधा है, स्टॉक से लेकर बिल के फॉर्मेट तक। दूसरा, यहां पैसा माल में नहीं, उधारी में फंसता है, क्योंकि रिटेलर को दिन देने पड़ते हैं और कंपनी को समय पर भुगतान करना पड़ता है। इसी वजह से इस लाइन में ज़्यादातर वही लोग टिकते हैं जो पहले से अंदर हैं: फार्मासिस्ट, पुराने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, या वे केमिस्ट जो मेडिकल स्टोर चलाते-चलाते होलसेल में उतरते हैं।
बाज़ार का आकार बहाना नहीं, पृष्ठभूमि है। IBEF के मुताबिक (Economic Survey 2025-26 के हवाले से, 2026) भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उत्पादक है और मूल्य के हिसाब से करीब चौदहवां; घरेलू बाज़ार FY26 में लगभग US$ 60 अरब यानी ₹5.30 लाख करोड़ का था, और निर्यात करीब US$ 31 अरब यानी ₹2.73 लाख करोड़ का। इतने बड़े बाज़ार में भी आपकी कमाई आपके शहर के दस-बीस केमिस्ट और दो-चार अस्पतालों से ही आएगी।
यह बिजनेस शुरू करने के लिए कौन योग्य है?
मालिक के लिए कोई डिग्री तय नहीं है। Drugs Rules, 1945 का Rule 64(2) कहता है कि परिसर एक competent person के चार्ज में होना चाहिए, और वह तीन में से कोई एक हो सकता है: रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट, या मैट्रिक पास जिसे दवा की बिक्री में चार साल का अनुभव हो, या मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय का ग्रेजुएट जिसे दवा के काम में एक साल का अनुभव हो।
यहीं पर हिंदी के ज़्यादातर पन्ने आज भी गलत हैं। वे लिखते हैं कि होलसेल लाइसेंस के लिए फुल-टाइम रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट रखना अनिवार्य है। रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की व्यक्तिगत निगरानी वाली शर्त Rule 65(2) में है और वह रिटेल बिक्री पर लागू होती है। होलसेल में Form 20B और 21B की शर्त यह है कि बिक्री उस competent person की व्यक्तिगत निगरानी में हो जिसका नाम लाइसेंस में दर्ज है। फर्क सीधा है: अगर आप ग्रेजुएट हैं और आपके पास एक साल का अनुभव है, तो आप खुद वह व्यक्ति हो सकते हैं, और स्टाफ का एक बड़ा खर्च बच जाता है।
अगर आप फार्मासिस्ट वाला रास्ता चुनते हैं तो उस व्यक्ति का राज्य फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन ज़िंदा होना चाहिए, और उसका सर्टिफिकेट आवेदन के साथ अपलोड होता है। अनुभव वाला रास्ता चुनें तो अनुभव प्रमाणपत्र उसी तरह मांगा जाता है।
जगह की शर्त पहले देखिए, बाद में नहीं। Rule 64 के प्रावधानों के अनुसार सिर्फ होलसेल लाइसेंस के लिए कम से कम 10 वर्ग मीटर और एक ही परिसर पर रिटेल तथा होलसेल दोनों लाइसेंस रखने पर कम से कम 15 वर्ग मीटर जगह चाहिए। जो दुकान इस नाप से छोटी है, उसका किराया सस्ता होने का कोई मतलब नहीं।
होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन कैसे करते हैं?
लाइसेंस राज्य सरकार की नियुक्त की हुई लाइसेंसिंग अथॉरिटी देती है, CDSCO नहीं (Rule 59(1))। CDSCO की भूमिका 2026 में यह है कि वह ONDLS यानी Online National Drugs Licensing System (statedrugs.gov.in) चलाता है, जिस पर ज़्यादातर राज्य आवेदन लेते हैं। कुछ बड़े राज्य अब भी अपना FDA पोर्टल चलाते हैं, और कई मंज़ूरियां NSWS से भी रूट होती हैं। यानी 2021 वाला फाइल लेकर दफ्तर के चक्कर काटने का तरीका खत्म हो चुका है: रजिस्टर कीजिए, दस्तावेज़ अपलोड कीजिए, ऑनलाइन फीस भरिए, और उसी पोर्टल पर स्थिति देखते रहिए।
| क्या चाहिए | फॉर्म | सरकारी फीस (2026) |
|---|---|---|
| सामान्य दवाओं का होलसेल लाइसेंस | आवेदन Form 19, लाइसेंस Form 20B | ₹1,500 |
| Schedule C और C(1) दवाएं (वैक्सीन, इंसुलिन, इंजेक्शन) | आवेदन Form 19, लाइसेंस Form 21B | उसी Form 19 आवेदन में |
| Schedule X दवाएं | आवेदन Form 19C, लाइसेंस Form 20G | ₹500 |
| गाड़ी से होलसेल वितरण | आवेदन Form 19AA, लाइसेंस Form 20BB या 21BB | ₹500 |
| लाइसेंस की डुप्लिकेट कॉपी | अलग फॉर्म नहीं | ₹150 |
स्रोत: Drugs Rules, 1945, Rules 59, 61, 62C और 62D (CDSCO का समेकित पाठ, G.S.R. 360(E) दिनांक 01-07-2024 तक संशोधित)।
Form 19 खुद बहुत कम मांगता है: आवेदक का विवरण, competent person का नाम और योग्यता, दवाओं की श्रेणियां, विशेष भंडारण की जानकारी और फीस भरने का प्रमाण। बाकी लंबी सूची राज्य की लाइसेंसिंग अथॉरिटी ONDLS पर अपलोड के तौर पर मांगती है, और वह राज्य-दर-राज्य बदलती है। आम तौर पर इसमें फर्म का संविधान प्रमाण (incorporation certificate, MOA और AOA, या पार्टनरशिप डीड), परिसर का मालिकाना या किरायानामा और मकान मालिक का ownership proof, साइट प्लान और की-प्लान, हलफनामे, competent person का नियुक्ति पत्र और उसका रजिस्ट्रेशन या अनुभव प्रमाणपत्र, तथा भुगतान की रसीद शामिल रहती है।
अब सबसे बड़ी खबर, जिस पर पुराने लेख आज भी चुप हैं: सेल लाइसेंस अब perpetual है। Rule 63, जिसे G.S.R. 1337(E) दिनांक 27-10-2017 से बदला गया, कहता है कि Form 20, 20A, 20B, 20BB, 20F, 20G, 21, 21A, 21B और 21BB का लाइसेंस अनिश्चित काल तक वैध रहता है, बशर्ते जारी होने की तारीख से हर पांच साल पूरे होने से पहले licence retention fee जमा हो जाए, जो उतनी ही होती है जितनी लाइसेंस की मूल फीस थी। देर होने पर हर महीने या महीने के हिस्से पर लाइसेंस फीस का 2% जुर्माना लगता है, और छह महीने बीतने पर लाइसेंस deemed cancelled मान लिया जाता है। इसलिए "पांच साल में renewal" वाला पुराना मॉडल भूल जाइए; सही मॉडल है, तारीख याद रखिए और retention fee समय पर भर दीजिए।
लाइसेंस मिलने के बाद निरीक्षण राज्य की लाइसेंसिंग अथॉरिटी के अधीन Drugs Inspector करते हैं। Form 20B और 21B की शर्त के मुताबिक लाइसेंस की शर्तों तथा अधिनियम और नियमों के पालन का आकलन तीन साल में कम से कम एक बार, या जोखिम के आधार पर उससे पहले भी किया जाएगा। इंस्पेक्टर की टिप्पणी के लिए Form 35 में Inspection Book रखना अनिवार्य है (Rule 65(16))।
आवेदन में कितना समय लगेगा, इसका कोई एक राष्ट्रीय आंकड़ा नहीं है। यह राज्य, दस्तावेज़ों की पूर्णता और निरीक्षण की तारीख पर निर्भर करता है, और ONDLS पर स्थिति खुद दिखती रहती है।
दुकान, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज की क्या शर्तें हैं?
न्यूनतम जगह कानून में तय है: होलसेल के लिए 10 वर्ग मीटर, रिटेल के साथ होलसेल के लिए 15 वर्ग मीटर। Rule 64(1) आगे कहता है कि परिसर पर्याप्त हो और उसमें दवाओं के गुण बनाए रखने लायक भंडारण की व्यवस्था हो, और Form 19 का चौथा बिंदु "विशेष भंडारण व्यवस्था" का ब्यौरा मांगता है।
किसी केंद्रीय नियम में "फ्रिज और AC लगाइए" ऐसा शब्दों में नहीं लिखा है, इसलिए किसी भी लेख का ऐसा दावा भरोसे लायक नहीं। असली तर्क दूसरा है। सीरा, इंजेक्शन वाली वैक्सीन, इंसुलिन, पैरेंटरल एंटीबायोटिक, आंखों की तैयारियां और स्टेराइल सिंगल-यूज़ डिवाइस Schedule C और C(1) में आते हैं, और यही वह टोकरी है जिसे Form 21B कवर करता है। कोल्ड चेन नहीं रखेंगे तो व्यवहार में आप इस पूरी टोकरी से बाहर रह जाएंगे, जहां अच्छा-खासा कारोबार बैठता है। यह चुनाव है, चूक नहीं।
एक्सपायर हो चुके माल के लिए अलग कोना बनाना भी शर्त है। Rule 65(17) के तहत एक्सपायरी के बाद दवा बेचना या स्टॉक में रखना मना है, और कंपनी को वापसी या मुआवज़े के इंतज़ार में रखा माल बिक्री वाले स्टॉक से अलग, ऐसे डिब्बों में रखना होगा जिन पर साफ़-साफ़ "Not for sale" लिखा हो।
इंस्पेक्टर आने पर व्यवहार में यही देखा जाता है: लाइसेंस और उसमें दर्ज competent person मौजूद है या नहीं, Form 35 की इंस्पेक्शन बुक, बिक्री और खरीद के रिकॉर्ड, Schedule H1 रजिस्टर, ठंडे स्टोरेज का तापमान, और एक्सपायरी वाले माल का अलग रखा जाना।
कुल लागत कितनी बैठती है?
इस धंधे में सिर्फ एक खर्च पक्का है: Form 19 के आवेदन पर ₹1,500 की सरकारी फीस (2026)। इंटरनेट पर घूमता ₹30,000 का "लाइसेंस खर्च" सरकारी फीस नहीं है, वह ज़्यादा से ज़्यादा किसी सलाहकार की सेवा शुल्क है। सेवा लेना गलत नहीं, बस यह पता रहे कि आप किसके पैसे दे रहे हैं।
| मद | 2026 में क्या पक्का है | किस बात पर घटती-बढ़ती है |
|---|---|---|
| ड्रग लाइसेंस फीस | ₹1,500 (Form 19) | Schedule X या गाड़ी वाला लाइसेंस लें तो ₹500 और |
| GST रजिस्ट्रेशन | कोई सरकारी फीस नहीं | CA की फीस अलग |
| Udyam रजिस्ट्रेशन | कोई फीस नहीं, PAN और GSTIN से खुद हो जाता है | कुछ नहीं |
| शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट या ट्रेड लाइसेंस | राज्य या नगर निगम तय करता है | शहर, दुकान का आकार |
| किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट | कम से कम 10 वर्ग मीटर जगह चाहिए | इलाका, अस्पताल और केमिस्ट बाज़ार से दूरी |
| रैक, फर्नीचर, AC, फार्मा-ग्रेड फ्रिज | कोई भरोसेमंद राष्ट्रीय आंकड़ा नहीं, तीन कोटेशन लीजिए | कोल्ड चेन रखेंगे या नहीं |
| बिलिंग सॉफ्टवेयर | अब ज़्यादातर मासिक subscription, यानी यह setup नहीं, चालू खर्च है | यूज़र और गोदाम की संख्या |
| स्टाफ | कानूनी न्यूनतम मज़दूरी राज्य या CLC की अधिसूचना से तय (CLC का VDA आदेश 02-04-2026) | competent person, बिलिंग, डिलीवरी, वसूली |
| ओपनिंग स्टॉक | सबसे बड़ी अकेली मद | कितनी कंपनियों की एजेंसी ली, हर एक का minimum order |
| वर्किंग कैपिटल | अलग से रखें, स्टॉक में न गिनें | रिटेलर को कितने दिन की उधारी दी |
"मेडिकल होलसेल में ₹40 लाख से ₹80 लाख लगते हैं" जैसे आंकड़े का कोई प्राथमिक स्रोत नहीं है, और पुराने लेखों में तो उनकी अपनी लाइन-आइटम सूची भी उस जोड़ तक नहीं पहुंचती थी। सही तरीका यह है कि ऊपर की हर पंक्ति में अपने शहर का असली नंबर भरिए और जोड़ लीजिए। दो कंपनियों से शुरू करने वाले और दस कंपनियों की एजेंसी लेने वाले की पूंजी एक जैसी हो ही नहीं सकती।
चालू खर्च को सेटअप से अलग रखिए: किराया, तनख्वाह, सॉफ्टवेयर subscription, डिलीवरी का डीज़ल, बिजली, और हर पांच साल में आने वाली retention fee। और उधारी का चक्र समझिए, क्योंकि जिस दिन आप रिटेलर को 30 दिन देते हैं और कंपनी से 15 दिन में भुगतान मांगा जाता है, उस फर्क को भरने वाला पैसा ही वर्किंग कैपिटल है। कम पड़ने पर बिजनेस लोन के विकल्प देखने से पहले Udyam रजिस्ट्रेशन करा लीजिए, इससे CGTMSE जैसी बिना गारंटी वाली योजनाओं का रास्ता खुलता है।
मार्जिन और मुनाफा कितना मिलता है?
कानून में होलसेलर का मार्जिन कहीं तय नहीं है, इसलिए "6 से 10 प्रतिशत" जैसे आंकड़े ट्रेड की बातचीत हैं, नियम नहीं। दो चीज़ें ज़रूर तय हैं। पहली, NPPA के DPCO 2013 के तहत अनुसूचित फॉर्मूलेशन की ceiling price में 16% "margin to retailer" पहले से जुड़ा होता है, और Schedule-I अब NLEM 2022 है, यानी पहले से ज़्यादा दवाएं इस दायरे में हैं। दूसरी, DPCO के पैरा 20 के तहत गैर-अनुसूचित दवा की MRP बारह महीनों में 10% से ज़्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती। जून 2026 के संशोधन आदेश (S.O. 3516(E), 30-06-2026) ने सरकार को पैक के प्रकार, आकार और सामग्री के हिसाब से अलग कीमत तय करने का अधिकार भी दे दिया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि आवश्यक दवाओं की लाइनों पर मार्जिन पतला और बंधा हुआ रहेगा, और असली मार्जिन गैर-अनुसूचित ब्रांड्स तथा जनरल लाइनों में बनेगा। अपने पोर्टफोलियो को इसी नज़र से देखिए, न कि किसी औसत प्रतिशत के भरोसे।
कागज़ का मार्जिन और जेब का मार्जिन अलग होते हैं। बोनस या क्वांटिटी डिस्काउंट से असली कमाई बढ़ती है, पर मार्च 2024 से दवा मार्केटिंग UCPMP 2024 के दायरे में है और कंपनियों को अपने मार्केटिंग खर्च की घोषणा विभाग के पोर्टल पर करनी होती है। इसलिए हर स्कीम बिल पर दिखनी चाहिए, ज़ुबानी वादे के भरोसे स्टॉक मत उठाइए। इसके बाद असली मार्जिन तीन जगह से कटता है: उधारी के दिन, एक्सपायरी में फंसा माल, और वह स्टॉक जो चलता ही नहीं।
मुनाफे का कोई एक नंबर देना बेईमानी होगी। ब्रेक-ईवन इस तरह निकालिए: महीने का कुल तय खर्च भाग आपका असली नेट मार्जिन प्रतिशत, इससे वह मासिक टर्नओवर निकलता है जिसके नीचे आप घाटे में हैं। यही एक हिसाब है जो आपके अपने शहर में सच होगा।
स्टॉक और एक्सपायरी कैसे संभालें?
एक्सपायरी की सीमा नियम में लिखी है: Rule 96(1)(vii) के अनुसार Schedule P से बाहर की दवाओं पर लेबल की एक्सपायरी तारीख निर्माण की तारीख से 60 महीने यानी पांच साल से आगे नहीं हो सकती, और Schedule P वाली दवाओं की उम्र उसी अनुसूची से तय होती है। पुराने लेखों में यही बात 1948 के किसी अधिनियम और नियम 98 के हवाले से लिखी मिलती है; वे हवाले गलत हैं, संख्या सही है।
रिकॉर्ड तीन जगह रखने होते हैं, और तीनों की अवधि नियम में लिखी है। होलसेल के नकद या उधार मेमो में तय ब्यौरे होने चाहिए और उनकी कार्बन कॉपी तीन साल संभालनी होती है (Rule 65(5))। Schedule H1 दवाओं का अलग रजिस्टर तीन साल रखना होता है (Rule 65(3)(h))। और Schedule H, H1 तथा X दवाओं के लिए डॉक्टर या अस्पताल का लिखित ऑर्डर दो साल तक संभालना होता है (Rule 65(9)(b))।
2023 से एक नया औज़ार आपके हाथ में है। Rule 96(6) और (7) के तहत, जो G.S.R. 823(E) दिनांक 17-11-2022 से जुड़े और 1 अगस्त 2023 से लागू हुए, Schedule H2 में सूचीबद्ध शीर्ष 300 ब्रांड्स पर बारकोड या QR कोड होना ज़रूरी है, जिसमें यूनीक प्रोडक्ट कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, निर्माता का नाम-पता, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तारीख तथा निर्माण लाइसेंस नंबर दर्ज होता है। Rule 96(5) हर API यानी बल्क ड्रग के लेबल पर QR कोड मांगता है। आने वाला माल असली है या नहीं, यह जांचने का यह मुफ्त तरीका है, और नकली दवा का जोखिम इसी से घटता है।
रोज़ का काम सीधा है: बैच के हिसाब से एंट्री, सॉफ्टवेयर से हर हफ्ते नियर-एक्सपायरी लिस्ट, और सबसे पहले वही बैच निकालना जिसकी एक्सपायरी सबसे पास है। प्रिस्क्रिप्शन वाली धीमी चलने वाली दवाएं कम मात्रा में रखिए और मौसमी बीमारियों में तेज़ चलने वाली आम लाइनों पर गहराई रखिए। Schedule X और नारकोटिक्स के लिए अलग लाइसेंस, अलग रजिस्टर और अलग जवाबदेही है; शुरुआत के साल में इनसे दूर रहना ही समझदारी है।
कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप कैसे मिलती है?
कंपनी या उसके C&F एजेंट से बात शुरू होती है, और वे सबसे पहले आपका लाइसेंस देखते हैं। स्टॉकिस्ट नियुक्त करने से पहले आम तौर पर Form 20B और 21B की कॉपी, GSTIN, PAN, फर्म का संविधान प्रमाण, बैंक विवरण, और गोदाम तथा कोल्ड स्टोरेज की जानकारी मांगी जाती है। minimum order commitment, सिक्योरिटी डिपॉजिट और टेरिटरी, तीनों बातचीत की चीज़ें हैं, इसलिए तीनों कागज़ पर लिखवाइए। ONDLS पर लाइसेंस का सार्वजनिक सत्यापन उपलब्ध है, इसका इस्तेमाल तब भी कीजिए जब आप खुद किसी सब-डीलर को माल देने जा रहे हों।
शुरुआत में कम कंपनियां लेकर गहराई में जाना, दस कंपनियों में बंटने से बेहतर है। कारण साफ है: हर कंपनी का अपना minimum order होता है और उसका पैसा आपके स्टॉक में जमकर बैठ जाता है। जिस कंपनी के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव आपके इलाके में डॉक्टरों तक सक्रिय हैं, उसकी मांग बनी-बनाई मिलती है और आपका काम उसे पूरा करना भर रहता है। जिसकी MR टीम इलाके में नहीं है, उसका माल आपके गोदाम में एक्सपायरी की तरफ बढ़ता है।
ग्राहक कैसे बनाएं और माल कैसे बेचें?
आपके खरीदार चार तरह के होते हैं: रिटेल केमिस्ट, क्लिनिक और नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, और ट्रस्ट या धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के चलाए अस्पताल। इनमें से हर एक की ऑर्डर की आदत अलग है, और सबसे टिकाऊ रिश्ता उसी के साथ बनता है जिसे आप वक्त पर माल पहुंचाते हैं।
मुकाबला असल में दो चीज़ों पर होता है, कीमत पर नहीं: डिलीवरी कितनी जल्दी और कितनी बार, और उधारी के दिन कितने। दोनों आपके पैसे से चलते हैं, इसलिए दोनों की सीमा पहले से तय कीजिए और हर ग्राहक के लिए एक क्रेडिट लिमिट लिखकर रखिए। छोटे कस्बों में क्लिनिक अक्सर सस्ते वैकल्पिक ब्रांड मांगते हैं, जबकि बड़े शहरों की दुकानें जानी-मानी ब्रांड गहरे डिस्काउंट पर मांगकर MRP पर बेचती हैं। यह ट्रेड का अनुभव है, कोई आंकड़ा नहीं, पर स्टॉक चुनते वक्त काम आता है।
सरकारी और अर्ध-सरकारी अस्पतालों की सप्लाई आज भी टेंडर से होती है, पर रास्ता अब साफ़ है: Government e-Marketplace (gem.gov.in) और Central Public Procurement Portal (eprocure.gov.in), इनके अलावा राज्यों के मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के अपने पोर्टल। दोनों राष्ट्रीय पोर्टल चालू हैं और उन पर रजिस्ट्रेशन मुफ्त है। टेंडर की पात्रता शर्तें हर टेंडर में अलग होती हैं, इसलिए पहले दो-चार टेंडर सिर्फ पढ़िए, भरिए मत।
GST, बिलिंग और अन्य रजिस्ट्रेशन में क्या ज़रूरी है?
2021 के बाद इस पेज पर सबसे बड़ा बदलाव यही है: 22 सितंबर 2025 से लगभग सभी दवाओं पर GST 12% से घटकर 5% हो गया, 33 जीवनरक्षक दवाएं 12% से शून्य पर और तीन और दवाएं 5% से शून्य पर आ गईं, तथा कई चिकित्सा उपकरण 18% से 5% और एक अन्य समूह 12% से 5% पर आया (GST Council की 56वीं बैठक की सिफारिशें, 3-4 सितंबर 2025)। जिस लेख में आज भी 12% लिखा है, वह पुराना है। यह बदलाव आपकी हर लाइन की MRP, बिल की दर और वर्किंग कैपिटल, तीनों को छूता है।
बिल में ट्रेड बैच नंबर, एक्सपायरी और HSN कोड देखता है, और यही तीनों रिटेलर के अपने रिकॉर्ड और वापसी के दावों का आधार बनते हैं। GST इनवॉइस के नियम और फॉर्मेट एक बार ठीक से सेट कर लीजिए, बाद में हर महीने का काम आसान रहता है।
बाकी रजिस्ट्रेशन छोटे हैं पर छूटने नहीं चाहिए। शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट या ट्रेड लाइसेंस नगर निगम से लीजिए। Udyam रजिस्ट्रेशन मुफ्त, पूरी तरह ऑनलाइन और स्व-घोषणा पर होता है, इसके लिए PAN और GSTIN चाहिए; 1 अप्रैल 2025 से माइक्रो की सीमा ₹2.5 करोड़ निवेश और ₹10 करोड़ टर्नओवर है, और छोटे उद्यम की ₹25 करोड़ तथा ₹100 करोड़, इसलिए नया होलसेलर कई साल तक माइक्रो श्रेणी में ही रहेगा और उसे MSMED के देर से भुगतान वाले संरक्षण का लाभ मिलता है। IEC सिर्फ तब चाहिए जब आप सचमुच आयात या निर्यात करेंगे, और वह DGFT की वेबसाइट से ऑनलाइन बनता है। हर राज्य की शर्तें थोड़ी अलग होती हैं, इसलिए आखिरी पुष्टि अपने राज्य के ड्रग कंट्रोल विभाग और अपने CA से करा लीजिए।
नए होलसेलर सबसे आम गलतियां कौन सी करते हैं?
सबसे महंगी गलती स्टॉक की होती है। कंपनी की स्कीम देखकर प्रिस्क्रिप्शन वाली धीमी दवाओं का बड़ा लॉट उठा लेना आसान है, और उसी माल की एक्सपायरी अगले साल आपकी पूरी साल की बचत खा जाती है। दूसरी गलती उधारी की है: बिना लिमिट के हर रिटेलर को दिन देते जाना, और फिर कंपनी का भुगतान अपनी जेब से करना।
तीसरी गलती कोल्ड चेन को हल्के में लेना है। एक बार तापमान बिगड़ने पर Schedule C और C(1) का माल कागज़ पर सही दिखेगा और असल में बेकार होगा, और जवाबदेही आपकी है। चौथी, और सबसे आम, यह मानना कि सेटअप की पूंजी ही सारी पूंजी है। दुकान बन जाने के बाद असली परीक्षा वर्किंग कैपिटल की है। और पांचवीं, retention fee की तारीख भूल जाना, जिसका अंजाम जुर्माना और छह महीने बाद लाइसेंस का deemed cancellation है।
उधार का हिसाब कच्चे रजिस्टर में रखने की जगह OkCredit जैसा मुफ्त डिजिटल खाता ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां हर एंट्री का SMS ग्राहक को भी जाता है और बकाया पर अपने आप रिमाइंडर चला जाता है (Android ऐप)। दुकान चलाने की रोज़मर्रा की सावधानियों के लिए मेडिकल स्टोर मालिकों के लिए क्या करें और क्या न करें भी पढ़ लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेडिकल होलसेल बिजनेस के लिए कौन सा लाइसेंस चाहिए?
राज्य की लाइसेंसिंग अथॉरिटी से होलसेल ड्रग लाइसेंस। आवेदन Form 19 पर होता है और लाइसेंस Form 20B में मिलता है; Schedule C और C(1) दवाओं के लिए साथ में Form 21B। Schedule X के लिए अलग से Form 19C पर आवेदन और Form 20G का लाइसेंस लगता है (Drugs Rules, 1945, 2026)।
क्या होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट रखना ज़रूरी है?
नहीं। Rule 64(2) के तहत परिसर एक competent person के चार्ज में होना चाहिए, जो रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट, या चार साल के अनुभव वाला मैट्रिक पास, या एक साल के अनुभव वाला ग्रेजुएट हो सकता है। रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की व्यक्तिगत निगरानी वाली शर्त रिटेल बिक्री पर लागू होती है (Rule 65(2))।
ड्रग लाइसेंस की सरकारी फीस कितनी है और क्या हर पांच साल में renewal कराना पड़ता है?
Form 19 के आवेदन पर ₹1,500 (2026)। Renewal अब होता ही नहीं। 2017 के संशोधन के बाद Rule 63 के तहत लाइसेंस अनिश्चित काल तक वैध है, बशर्ते हर पांच साल पूरे होने से पहले उतनी ही रकम की retention fee जमा हो। देर पर हर महीने 2% जुर्माना और छह महीने बाद लाइसेंस deemed cancelled।
दवा के होलसेल में कितना मार्जिन मिलता है?
कानून में होलसेलर का मार्जिन तय नहीं है। तय यह है कि DPCO 2013 के तहत अनुसूचित दवाओं की ceiling price में 16% रिटेलर मार्जिन जुड़ा होता है और गैर-अनुसूचित दवा की MRP बारह महीनों में 10% से ज़्यादा नहीं बढ़ सकती। असली कमाई बोनस या क्वांटिटी डिस्काउंट, उधारी के दिनों और एक्सपायरी के नुकसान से घटती-बढ़ती है, इसलिए कोई एक प्रतिशत मान लेना गलत है।
दवाओं पर GST कितना है?
22 सितंबर 2025 से लगभग सभी दवाओं पर 5%, जो पहले 12% था; 33 जीवनरक्षक दवाओं पर शून्य। कई चिकित्सा उपकरण भी 18% या 12% से घटकर 5% पर आ गए (GST Council, 56वीं बैठक)।