मेडिकल स्टोर के नियम 2026: दुकान चलाते वक्त क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

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मेडिकल स्टोर के नियम 2026: दुकान चलाते वक्त क्या करें और क्या बिल्कुल न करें
मेडिकल स्टोर के नियम 2026: दुकान चलाते वक्त क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

काउंटर पर तीन शर्तें रोज़ निभानी पड़ती हैं: दवा registered pharmacist की personal supervision में ही बिके (Rule 65(2)), expiry के बाद कोई दवा shelf पर न रहे (Rule 65(17)), और licence की retention fee हर पाँच साल पूरे होने से पहले जमा हो जाए। 2017 के बाद drug licence expire नहीं होता, पर fee चूकने पर deemed cancelled हो जाता है।

मेडिकल स्टोर चलाने के लिए कौन-कौन से लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन हर वक्त वैध होने चाहिए?

Retail drug licence अब हर पाँच साल पर renew नहीं कराना पड़ता। 27 अक्टूबर 2017 की notification G.S.R. 1337(E) ने Rule 63 बदल दिया, और तब से Form 20, 20A, 20B, 20BB, 20F, 20G, 21, 21A, 21B और 21BB वाले sale licence हमेशा के लिए वैध रहते हैं, बशर्ते हर आने वाले पाँच साल खत्म होने से पहले licence retention fee जमा हो जाए (Drugs Rules 1945, CDSCO consolidation 01-07-2024)।

Retention fee उतनी ही है जितनी licence लेते वक्त लगी थी। देर होने पर हर महीने licence fee का 2% जुड़ता जाता है, ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने तक; उसके बाद licence deemed cancelled मान लिया जाता है। यही आज की सबसे महंगी चूक है, क्योंकि cancelled licence पर बिक्री का मतलब है बिना licence बिक्री, और Drugs and Cosmetics Act 1940 की Section 27(b)(ii) में उसकी सज़ा 3 से 5 साल की क़ैद और कम से कम ₹1 लाख या ज़ब्त दवाओं की तीन गुना कीमत, जो ज़्यादा हो, का जुर्माना है।

नई दुकान का application Form 19 में जाता है और fee 2026 में ₹1,500 है; restricted licence (Form 19A) और Schedule X वाले licence (Form 19C) के लिए ₹500 (Rule 59(2))। Application राज्य सरकार के नियुक्त licensing authority यानी state drugs control administration या state FDA के पास जाता है, CDSCO के पास नहीं (Rule 59(1))। राज्य के portal अपनी inspection और processing charges अलग से जोड़ते हैं, इसलिए जेब से निकलने वाली कुल रकम राज्य के हिसाब से बदलती है; अपने राज्य की fee page पर एक बार खुद देख लीजिए।

Form 20 में ही लिखा है कि licence की compliance जाँच risk-based तरीके से कम से कम हर तीन साल में एक बार होती है। यानी inspection की तारीख आपके हाथ में नहीं है, register रोज़ अपडेट रखना ही एकमात्र तैयारी है।

बाकी registration दवा कानून के नहीं, आम कारोबार के हैं: GST registration, नगर निगम का trade licence और राज्य का shops & establishment registration। इनकी fee और limits हर राज्य में अलग हैं, इसलिए आंकड़ा अपने CA या नगर निगम से confirm कीजिए। MSME वाला Udyam registration फायदेमंद है पर drug licence की शर्त नहीं है।

काउंटर पर रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर नियम क्या कहते हैं?

Rule 65(2) साफ है: prescription वाली हर बिक्री registered pharmacist के हाथों या उसकी personal supervision में होनी चाहिए, और उसका State Pharmacy Council registration उस दिन current होना चाहिए। इसके ऊपर Rule 64(1) कहता है कि premises किसी competent person के ज़िम्मे हो और Schedule N की शर्तें पूरी करे।

Pharmacy Act 1948 के तहत registration के लिए मान्य qualification D.Pharm (दो साल), B.Pharm और Pharm.D हैं। M.Pharm postgraduate degree है, registration का अलग रास्ता नहीं। और यह याद रखिए कि inspector degree का certificate नहीं, council का registration देखता है; degree होना अलग बात है, registration current होना अलग।

अगर मालिक के पास खुद pharmacy की degree नहीं है तो रास्ता एक ही है, full-time registered pharmacist रखना। किसी और के certificate पर दुकान चलाना पहले भी गैरकानूनी था और अब पकड़ में आना और आसान हो गया है: PCI ने 13 दिसंबर 2023 से pharmacist registration की Aadhaar authentication अनिवार्य कर दी है, यानी एक ही व्यक्ति दो दुकानों पर काग़ज़ों में नहीं दिखाया जा सकता। Matriculation प्लस चार साल के अनुभव वाला competent person का रास्ता wholesale licence के लिए है (Rule 64(2)), retail pharmacy के लिए नहीं।

Inspection में जो तीन चीज़ें माँगी जाती हैं, वे तैयार रखिए: pharmacist का registration certificate उसकी renewal तारीख के साथ, appointment letter या affidavit, और यह कि counter पर वह सच में मौजूद रहता है। Pharmacist की गैरहाज़िरी में बिक्री Rule 65(2) का उल्लंघन है; Rule 66 के तहत licensing authority show-cause के बाद licence suspend या cancel कर सकती है, और Section 27(d) में 1 से 2 साल की क़ैद और कम से कम ₹20,000 जुर्माने का प्रावधान है।

प्रिस्क्रिप्शन और शेड्यूल H, H1, X दवाओं पर क्या करें और क्या बिल्कुल न करें?

भारतीय दवा कानून में "OTC" जैसी कोई official category है ही नहीं। सही बँटवारा scheduled बनाम non-scheduled है: Schedule H, Schedule H1 और Schedule X की दवाएँ registered medical practitioner के prescription पर ही बिक सकती हैं (Rule 65(9)), और बाकी दवाएँ बिना पर्चे के, लेकिन तब भी registered pharmacist की निगरानी में।

Schedule H1 की सूची अब 50 molecules की हो चुकी है। इसमें Oxytocin (47), Tapentadol (48), Oseltamivir (49) और Zanamivir (50) बाद में जोड़े गए, यानी flu के मौसम में जो antiviral सबसे ज़्यादा माँगे जाते हैं वे अब H1 में हैं और बिना पर्चे के देना सीधा उल्लंघन है। H1 की हर बिक्री अलग register में चढ़ती है: डॉक्टर का नाम और पता, मरीज़ का नाम, दवा का नाम और मात्रा। यह register तीन साल संभालना है और inspection में दिखाना है (Rule 65(3)(h))।

Schedule X अलग खेल है। इसके लिए अलग licence लगता है (Form 19C पर application, Form 20F/21G), stock ताले वाली अलमारी में रहता है, और prescription तथा signed order दो साल तक संभालने होते हैं। Schedule N के तहत POISON लिखी हुई lock-and-key वाली अलमारी premises की शर्त है, सजावट नहीं।

क्या रखना है कितने साल
बिक्री के cash/credit memo की copy 3 साल
Schedule H1 register 3 साल
Schedule X के prescription और signed order 2 साल
बाकी सभी register आखिरी entry से कम से कम 2 साल

एक आदत जो झगड़े से बचाती है: पर्चा पढ़ने में न आए तो अंदाज़े से दवा मत दीजिए। ग्राहक को डॉक्टर के पास वापस भेजिए या डॉक्टर से खुद पुष्टि कीजिए। गलत molecule चला गया तो जवाबदेही आपकी है, पर्चा लिखने वाले की नहीं।

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दवाओं का स्टोरेज और कोल्ड चेन किस तरह संभालना चाहिए?

कोई केंद्रीय नियम मेडिकल स्टोर में AC लगाना अनिवार्य नहीं करता। कानूनी कसौटी Rule 64(1) है, जो कहती है कि premises पर्याप्त हों और वहाँ दवाओं के गुण बनाए रखने लायक proper storage हो; असली test वही तापमान है जो दवा के label पर छपा है। Label कहता है "store below 25°C" तो दुकान का तापमान वही साबित होना चाहिए, चाहे AC से हो या हवादार layout और छाया से।

Fridge तब ज़रूरी है जब आप cold chain वाली lines रखते हैं: vaccines, insulin, कुछ eye drops। उस हालत में fridge के अंदर thermometer और रोज़ का temperature log सबसे सस्ता सबूत है कि stock label पर लिखी शर्त में ही रखा गया। बिजली जाने पर backup का इंतज़ाम पहले से सोचिए, ताकि लंबे cut में भी fridge उसी तापमान range में रहे और log में वही दर्ज हो।

Schedule N की premises शर्तें याद रखने लायक हैं: dispensing area एक pharmacist के लिए कम से कम 6 वर्ग मीटर और हर अतिरिक्त pharmacist पर 2 वर्ग मीटर, छत की ऊँचाई कम से कम 2.5 मीटर, धोने लायक फर्श, और ताले वाली POISON अलमारी। बरसात में नमी और गर्मी में सीधी धूप, दोनों shelf की जगह तय करते वक्त सोचनी चाहिए।

Expired या टूटा-फूटा stock बिकने वाले stock के साथ नहीं रह सकता। Rule 65(17) उसे अलग रखने की इजाज़त सिर्फ इस शर्त पर देता है कि वह trade stock से अलग, ऐसे cartons में हो जिनके ऊपर साफ-साफ "Not for sale" लिखा हो।

एक्सपायरी और नियर-एक्सपायरी स्टॉक का सही तरीका क्या है?

Rule 65(17) के तहत expiry date के बाद दवा बेचना ही नहीं, stock में रखना भी उल्लंघन है। यह बारीकी बहुत काम की है: inspector को यह साबित करने की ज़रूरत नहीं कि आपने वह strip बेची, shelf पर मिल जाना ही काफ़ी है।

इसलिए महीने में एक तारीख तय कर लीजिए जब पूरे shelf का near-expiry pass होता हो। Drugs Rules में ऐसी कोई अवधि तय नहीं है, यह trade की चलन है: तीन से छह महीने में expire होने वाला माल आगे निकाल लीजिए, उसकी अलग सूची बनाइए और distributor के साथ अपनी return terms देखिए, क्योंकि हर distributor की expiry return policy और window अलग होती है और वह भी कानून का नहीं, आपके agreement का मामला है। जो माल वापस जाए उसका credit note, debit note और gate pass purchase bill के साथ नत्थी रखिए।

Batch number इसी वजह से हर जगह लिखा जाता है। Rule 65(3) खरीद के record में तारीख, supplier का नाम, पता और licence number, दवा का नाम, मात्रा, batch और निर्माता माँगता है, और purchase bill serially numbered तथा तारीख के क्रम में रखने होते हैं। Recall आने पर यही record बताता है कि वह batch आपके पास आया था या नहीं।

Expiry हो चुके माल को वापसी, reimbursement या disposal तक "Not for sale" cartons में अलग रखिए और उसका हिसाब लिखित में रखिए। जो stock न distributor वापस लेता है न आपने अलग किया है, वह shelf पर पड़ा-पड़ा licence का जोखिम बन जाता है।

कीमत, बिल और GST में मेडिकल स्टोर वाले कहाँ फँसते हैं?

22 सितंबर 2025 से सभी दवाओं पर GST 12% से घटकर 5% हो गया। यह फैसला 3 सितंबर 2025 की 56वीं GST Council बैठक में हुआ; 33 lifesaving दवाएँ 12% से nil पर आईं, तीन और 5% से nil पर, और कई medical devices तथा diagnostic kits 18% या 12% से 5% पर (GST Council press release)। पुराने rate पर बना billing software आज भी चल रहा हो तो हर बिल गलत जा रहा है।

दाम पर असली कानून DPCO 2013 है। Para 26 कहता है कि ग्राहक से current price list या label पर छपे दाम, जो कम हो, उससे ऊपर वसूली नहीं की जा सकती। Para 27 के मुताबिक strip काटकर दी गई दवा का दाम pro-rata से ज़्यादा नहीं हो सकता, यानी दस गोली की strip में से तीन देकर पूरी strip जितना पैसा लेना गलत है। और para 25(3) एक ऐसी duty है जिसे ज़्यादातर दुकानें भूल जाती हैं: निर्माता की price list और supplementary price list ऐसी जगह लगी हो जहाँ ग्राहक देख सके। किसी formulation की ceiling price जाँचनी हो तो NPPA की Pharma Sahi Daam सेवा official रास्ता है; NPPA revised retail prices लगातार notify करता रहता है, हाल की notifications 27 अगस्त और 1 सितंबर 2026 की हैं।

2026 में एक नया जोखिम जुड़ा है। 30 जून 2026 को notified Drugs (Prices Control) Amendment Order 2026 (S.O. 3516(E)) ने para 24(1) में proviso जोड़ा है: अगर निर्माता यह सबूत दे दे कि उसने घटी हुई price list दो हफ्ते के भीतर dealers तक भेजी, दो राष्ट्रीय अख़बारों में विज्ञापन दिया और अपनी website पर डाली, तो overcharged रकम सिर्फ उसी stock पर निकाली जाएगी जो ceiling price से ऊपर बेचते हुए पकड़े गए retailer, distributor या stockist के पास था। सीधा मतलब: price cut के बाद पुरानी MRP वाला माल बेचते रहना अब आपकी देनदारी है।

बिल पर कंजूसी मत कीजिए। हर बिक्री का cash या credit memo बनाइए और उसकी copy तीन साल रखिए, GST registered हैं तो GSTIN और सही 5% rate बिल पर दिखे, और batch number बिल पर छपवा लीजिए क्योंकि recall या शिकायत के वक्त वही एक लाइन आपका बचाव है। बिना बिल की नकद बिक्री record की उस कड़ी को तोड़ती है जो कानून आपसे माँगता है। Format की बारीकियाँ GST invoice के rules में देख लीजिए।

Online pharmacy के discount देखकर दाम गिराने से पहले हिसाब लगाइए। DPCO scheduled formulations की ceiling price में retailer का margin 16% तय कर चुका है, इसलिए नीचे जाने की गुंजाइश उतनी नहीं जितनी विज्ञापन दिखाते हैं।

कौन-सी गलतियाँ ड्रग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करा सकती हैं?

बिना वैध licence दवा बेचना सबसे भारी अपराध है: Section 27(b)(ii) में 3 से 5 साल की क़ैद और कम से कम ₹1 लाख या ज़ब्त दवाओं की तीन गुना कीमत, जो ज़्यादा हो, का जुर्माना। बाकी ज़्यादातर चूकें Section 27(d) में आती हैं, जहाँ 1 से 2 साल और कम से कम ₹20,000 का प्रावधान है। नकली या adulterated दवा से किसी की मौत या गंभीर नुकसान हो तो Section 27(a) में कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम ₹10 लाख जुर्माना है।

गलती Inspector को क्या दिखता है नतीजा
Pharmacist मौजूद नहीं या registration lapsed attendance, appointment letter, PCI registration की तारीख Rule 65(2) भंग; Rule 66 में show-cause के बाद suspension या cancellation; s.27(d)
Schedule H1 register अधूरा या गायब खाली column, तीन साल का record न होना s.27(d): 1 से 2 साल, कम से कम ₹20,000
Expired दवा बिकने वाले shelf पर batch और expiry की जाँच Rule 65(17) भंग; बिक्री साबित करने की ज़रूरत नहीं
बिना licensed source से खरीद cash/credit memo पर supplier का licence number नहीं, bills क्रम में नहीं Form 20 की शर्त 4 और Rule 65(3) भंग
Retention fee पाँच साल में जमा नहीं licensing authority का record हर महीने 2% अतिरिक्त, छह महीने बाद licence deemed cancelled
MRP या ceiling price से ऊपर बिक्री बिल बनाम price list, ग्राहक की शिकायत DPCO के तहत overcharged रकम की वसूली, 2026 संशोधन के बाद दुकान पर
नकली या बिना label वाला stock pack पर batch, expiry, निर्माता का licence number s.27(a) तक जा सकता है

खरीद हमेशा licensed source से हो। Form 20 की शर्त 4 कहती है कि कोई दवा तब तक नहीं बेची जाएगी जब तक वह किसी वैध licence वाले dealer या निर्माता से cash या credit memo पर न खरीदी गई हो। B2B online distributor से मँगाना गलत नहीं है, बशर्ते बेचने वाले के पास wholesale licence हो और memo पर उसका licence number छपा हो।

नकली माल पकड़ने का एक नया औज़ार भी है। Rule 96(6) और (7) तथा Schedule H2 के तहत 300 नामित brand packs पर निर्माता को bar code या QR code लगाना है, जिसमें unique product identification code, generic और brand नाम, निर्माता, batch number, manufacturing तथा expiry date और manufacturing licence number होता है। Consignment लेते वक्त इनमें से कुछ pack scan कर लेना एक मिनट का काम है।

Inspection notice या show-cause आए तो सबसे बुरी प्रतिक्रिया चुप रह जाना है। Rule 66 के तहत licence रद्द करने से पहले आपको सुना जाना ज़रूरी है, इसलिए दी गई तारीख के अंदर लिखित जवाब दीजिए, purchase bills, register और pharmacist के कागज़ की copy लगाइए, और जो कमी सच में है उसे सुधारकर उसका सबूत भी साथ भेजिए।

स्टॉक, उधार और कैश-फ्लो का हिसाब कैसे रखें?

मुनाफ़ा तय दायरे में बंधा है, खुला नहीं। DPCO 2013 scheduled यानी NLEM 2022 वाली formulations की ceiling price में retailer के लिए 16% margin पहले से जोड़कर रखता है; non-scheduled दवाएँ सिर्फ monitor होती हैं, जहाँ MRP बारह महीने में 10% से ज़्यादा नहीं बढ़ सकती। Branded, generic और non-scheduled lines के margin का कोई भरोसेमंद सरकारी आंकड़ा मौजूद नहीं है, इसलिए किसी लेख के औसत पर मत चलिए; अपनी purchase bill और बिक्री से खुद निकालिए कि किस line पर कितना बचता है।

असली रिसाव dead stock में होता है। जो दवा तीन महीने में एक बार बिकती है वह shelf पर पैसा नहीं, expiry की तारीख जोड़ रही है। महीने में एक बार fast mover और slow mover की सूची अलग कीजिए, slow वालों का order छोटा कीजिए, और near-expiry माल पहले निकालिए। Batch-expiry alert वाला billing software इस काम को मिनटों का बना देता है; POS और billing के विकल्प POS machine क्या है और उसके प्रकार में समझ आ जाएँगे।

दूसरा दबाव उधार का है। Distributor आपको गिने-चुने दिन की credit देता है, जबकि मोहल्ले के पुराने मरीज़ और आसपास के clinic महीने भर का खाता चलाते हैं। यही अंतर working capital खा जाता है, खासकर तब जब चढ़ा हुआ उधार copy में लिखा हो और किसी को याद न रहे। उधार का हिसाब रखने के लिए OkCredit जैसा free digital khata app इस्तेमाल कर सकते हैं; हर entry का SMS ग्राहक को भी चला जाता है और payment reminder अपने आप जाते हैं।

ऑनलाइन फार्मेसी और जन औषधि केंद्र के दौर में दुकान कैसे टिकाएँ?

E-pharmacy के लिए 2026 तक Drugs Rules में कोई notified नियम नहीं है। मई 2026 में यह टकराव खुलकर सामने आया: AIOCD ने 20 मई 2026 को देशव्यापी 24 घंटे की pharmacy बंदी बुलाई, 12 राज्यों के pharmacy संगठनों ने उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया, और CDSCO ने कहा कि उठाए गए मुद्दे सक्रिय समीक्षा में हैं और इस क्षेत्र का regulatory framework देखा जा रहा है (DD News, 18 मई 2026)।

दूसरा दबाव generic का है। 30 जून 2026 तक 20,149 जन औषधि केंद्र चालू हो चुके थे, 784 में से 776 ज़िलों में, और सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 25,000 का है (DD News, जुलाई 2026)। इनकी basket में 2,110 दवाएँ और 315 surgical, consumable तथा device items हैं, जो branded विकल्पों से 50 से 80% सस्ते बिकते हैं। केंद्र चलाने वालों को महीने की खरीद का 10% incentive मिलता है, जो ₹10,000 प्रति माह तक सीमित है, और 200 high-demand दवाएँ रखने पर ₹10,000 तक अलग से (DD News, 20 मार्च 2026)।

इस मुक़ाबले में दुकान वही बचाती है जो app नहीं कर सकता। एक घंटे में मोहल्ले में delivery, BP, शुगर और थायरॉइड जैसे chronic मरीज़ों को refill की याद दिलाना, आसपास के डॉक्टरों से भरोसे का रिश्ता, और यह कि पर्चा हाथ में लेकर कोई इंसान समझाए कि दवा कब और कैसे लेनी है। स्थानीय पहचान बनाने के तरीके अपने बिज़नेस की मार्केटिंग कैसे करें में विस्तार से हैं।

नई line जोड़ने से पहले licence देख लीजिए। Schedule X वाली दवाओं के लिए अलग licence चाहिए (Form 19C, Form 20F/21G), और जो चीज़ आपके licence में दर्ज नहीं है उसे रखने से पहले state drugs control से पूछना सस्ता पड़ता है।

आगे क्या आ रहा है, यह भी जान लीजिए। The Daily Brief (Zerodha) की 14 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने Drugs and Cosmetics Act 1940 की जगह लेने के लिए एक draft Drugs, Medical Devices and Cosmetics Bill 2026 circulate किया है, जिसमें manufacturing licensing को 36 राज्य नियामकों से हटाकर एक केंद्रीय authority को देने, छोटी procedural चूकों पर मुकदमे की जगह आर्थिक जुर्माना रखने, और पहली बार दवाओं की online बिक्री को साफ़ तौर पर संबोधित करने की बात है। अगस्त 2026 तक यह सिर्फ draft है और stakeholder consultation में है, कानून नहीं; इसलिए आज की duty वही है जो ऊपर लिखी है।

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नई दुकान खोल रहे हैं तो कम-से-कम क्या चाहिए?

कम से कम तीन चीज़ें: retail licence के लिए 10 वर्ग मीटर की जगह (अगर उसी premises पर wholesale licence भी लेना है तो 15 वर्ग मीटर), Form 19 के साथ ₹1,500 की fee, और एक full-time registered pharmacist। Schedule N के हिसाब से dispensing area 6 वर्ग मीटर से कम न हो, छत 2.5 मीटर से नीची न हो, फर्श धोने लायक हो और POISON अलमारी ताले में हो।

Application के साथ pharmacist का State Pharmacy Council registration certificate और appointment letter या affidavit, premises के ownership, tenancy या occupation का सबूत, site या blueprint plan (Rule 65A के तहत licensing authority इसे कभी भी माँग सकती है), firm के constitution और पहचान के कागज़, और storage तथा refrigeration के इंतज़ाम की declaration लगती है। Retail pharmacy के लिए किसी class-10 certificate की केंद्रीय शर्त नहीं है; matriculation प्लस चार साल का अनुभव वाला रास्ता wholesale के competent person के लिए है। राज्य अपनी checklist में कुछ और items जोड़ते हैं।

Licence कितने दिन में मिलेगा, इसका कोई समय Drugs Rules में तय नहीं है; timeline राज्य के right-to-service वादों से आती है और हर राज्य में अलग है। खोलने के कुल खर्च का भी कोई भरोसेमंद सरकारी आंकड़ा नहीं है, और बाज़ार में घूमते अनुमान इतने अलग-अलग हैं कि उन पर budget बनाना ठीक नहीं। सुरक्षित तरीका यह है कि किराया, fitting, fridge और opening stock के quotation अपने शहर से लीजिए, यह मानकर कि shelf का बड़ा हिस्सा distributor की credit पर भरेगा। शुरुआत का पूरा step-by-step मेडिकल स्टोर कैसे शुरू करें में दिया है।

मेडिकल स्टोर के नियमों पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मेडिकल स्टोर के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट रखना ज़रूरी है?

हाँ। Rule 65(2) के तहत prescription वाली दवा registered pharmacist की personal supervision में ही बिक सकती है और उसका State Pharmacy Council registration current होना चाहिए। PCI ने 13 दिसंबर 2023 से registration की Aadhaar authentication अनिवार्य कर दी है, इसलिए किसी और के certificate पर दुकान चलाना अब आसानी से पकड़ में आता है; सज़ा Section 27(d) में 1 से 2 साल और कम से कम ₹20,000 जुर्माना है।

क्या दवा MRP से ज़्यादा दाम पर बेची जा सकती है?

नहीं। DPCO 2013 के para 26 के मुताबिक ग्राहक से current price list या label पर छपे दाम, जो कम हो, उससे ऊपर वसूली नहीं हो सकती, और para 27 के तहत strip काटकर दी गई दवा का दाम pro-rata से ज़्यादा नहीं हो सकता। Ceiling price NPPA की Pharma Sahi Daam सेवा पर जाँची जा सकती है।

शेड्यूल H1 का रजिस्टर कितने साल रखना पड़ता है?

तीन साल, और वह inspection में दिखाने के लिए तैयार रहना चाहिए (Rule 65(3)(h))। रजिस्टर में डॉक्टर का नाम और पता, मरीज़ का नाम, दवा का नाम और मात्रा दर्ज होती है। Schedule H1 की सूची अब 50 molecules की है, जिसमें Oseltamivir और Zanamivir भी शामिल हैं।

ड्रग लाइसेंस कितने साल में रिन्यू कराना होता है?

2017 के बाद sale licence renew नहीं होता। Rule 63 में हुए बदलाव के बाद licence तब तक वैध रहता है जब तक हर पाँच साल पूरे होने से पहले licence retention fee जमा होती रहे। देर होने पर हर महीने licence fee का 2% जुड़ता है, छह महीने तक; उसके बाद licence deemed cancelled मान लिया जाता है।

एक्सपायर्ड दवा दुकान में रखने पर क्या होता है?

Rule 65(17) के तहत expiry के बाद दवा बेचना और stock में रखना, दोनों उल्लंघन हैं; shelf पर मिल जाना ही काफ़ी है, बिक्री साबित करने की ज़रूरत नहीं। वापसी या disposal तक ऐसा माल trade stock से अलग, ऊपर "Not for sale" लिखे cartons में रखा जा सकता है। उल्लंघन Section 27(d) में आता है: 1 से 2 साल और कम से कम ₹20,000 जुर्माना।


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