
BottleShop के जुलाई 2026 के ट्रेड अनुमान के मुताबिक कस्बे की एक शराब दुकान महीने में ₹50,000 से ₹1.5 लाख, मध्यम शहर की दुकान ₹2 से ₹5 लाख और मेट्रो की दुकान ₹6 से ₹12 लाख तक net बचाती है। ये अनुमान हैं, गारंटी नहीं। असली कमाई राज्य की excise policy, लाइसेंस की कीमत और लोकेशन तय करती है।
वाइन शॉप की कमाई प्रति महीने कितनी होती है?
शराब की दुकान की दुकान-स्तर की कमाई पर कोई सरकारी या press आँकड़ा प्रकाशित नहीं होता, इसलिए हर आँकड़ा अनुमान ही है। जुलाई 2026 के एक ट्रेड ब्लॉग (BottleShop) का अनुमान है कि छोटे कस्बे की दुकान महीने में ₹50,000 से ₹1.5 लाख, मध्यम शहर की ₹2 से ₹5 लाख और मेट्रो की high-footfall दुकान ₹6 से ₹12 लाख या उससे ऊपर net कमाती है। साल के हिसाब से यह ₹6 लाख से ₹1 करोड़ से ऊपर तक की चौड़ी रेंज बनती है, और यही चौड़ाई बताती है कि "average कमाई" जैसी कोई चीज़ इस धंधे में है ही नहीं।
तीन अलग-अलग चीज़ों को गड्डमड्ड मत कीजिए:
Revenue यानी काउंटर पर कुल बिक्री। एक ठीक-ठाक शहरी दुकान की महीने की बिक्री लाखों में होती है, पर वह पैसा आपका नहीं है, उसमें से बड़ा हिस्सा स्टॉक की अगली खरीद में वापस चला जाता है।
Margin यानी MRP का वह हिस्सा जो राज्य सरकार ने retailer के लिए तय किया है। यह आप तय नहीं करते।
Net profit यानी margin में से लाइसेंस फीस, दुकान का किराया, staff, बिजली, cold storage और excise से जुड़े खर्च निकालने के बाद जो बचता है। जिस दुकान का लाइसेंस नीलामी में करोड़ों में गया हो, उसका net profit उसी बिक्री पर बहुत कम रह जाता है।
कमाई में सबसे बड़ा फर्क राज्य डालता है। उत्तर प्रदेश में लाइसेंस फीस ₹1 लाख से नीचे है पर दुकान e-lottery से मिलती है; कर्नाटक में जनवरी 2026 की नीलामी में बेंगलुरु की retail licence का base price ही ₹1.5 करोड़ था। एक ही बिक्री पर इन दोनों दुकानों का मुनाफ़ा एक जैसा नहीं हो सकता।
बीयर, व्हिस्की और वाइन पर दुकानदार को कितना margin मिलता है?
भारत में शराब पर retail margin दुकानदार नहीं, राज्य सरकार तय करती है। CAG की 2019 की रिपोर्ट (No. 1 of 2019, liquor pricing) के मुताबिक MRP का ढाँचा इस तरह बनता है: ex-distillery price + excise duty + wholesaler margin + retailer margin + additional duty, और इनमें से हर हिस्सा राज्य की अधिसूचना से तय होता है। उसी रिपोर्ट में एक दिलचस्प तुलना है: 2016-17 में 750 ml IMFL बोतल पर UP के retailer को ₹76.16 मिलते थे, जबकि राजस्थान में ₹41.33। एक ही बोतल, दो राज्य, लगभग दोगुना फर्क।
2026 के लिए कोई भरोसेमंद, आधिकारिक margin प्रतिशत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इंटरनेट पर जो प्रतिशत घूमते हैं (कहीं 3-6%, कहीं 25-30%) वे आपस में इतने विरोधाभासी हैं कि उन पर पैसा लगाना ठीक नहीं। इसलिए यहाँ हम कोई नंबर नहीं दे रहे। अपने राज्य की excise price notification या अधिकृत wholesaler से बोतल-दर-बोतल retailer margin पूछ लेना ही एकमात्र भरोसेमंद तरीका है।
दिशा फिर भी साफ है:
| श्रेणी | margin की दिशा | बिक्री की मात्रा |
|---|---|---|
| बीयर | सबसे कम | सबसे ज़्यादा, गर्मियों में और भी |
| देसी शराब / country liquor | कम | ऊँची, कीमत-संवेदनशील ग्राहक |
| IMFL (व्हिस्की, रम, वोदका) | बीच में | दुकान की रीढ़ |
| Premium और imported स्पिरिट, वाइन | सबसे ज़्यादा | कम, पर टिकट साइज़ बड़ा |
यानी बीयर से आपका फुटफॉल बनता है और premium बोतलों से मुनाफ़ा। जिस दुकान के आसपास premium ग्राहक नहीं है, वहाँ सिर्फ़ बीयर के भरोसे बड़ी कमाई मुश्किल है।
एक बड़ा बदलाव कर्नाटक में हो रहा है। मार्च 2026 में रिपोर्ट हुई नई excise policy के तहत राज्य सरकार-निर्धारित MRP से हट रही है, 16 price slabs घटाकर 8 कर रही है और duty को alcohol strength से जोड़ रही है। अगर यह लागू हुआ तो कर्नाटक पहला बड़ा राज्य होगा जहाँ retail pricing कुछ हद तक बाज़ार तय करेगा।
शराब की दुकान का लाइसेंस किस राज्य में कितने का पड़ता है?
पूरे भारत के लिए कोई एक लाइसेंस फीस है ही नहीं, क्योंकि excise संविधान के हिसाब से राज्य का विषय है। फीस, आवंटन का तरीका और यहाँ तक कि नई दुकान खुलेगी या नहीं, यह सब हर राज्य अपनी सालाना excise policy में तय करता है।
| राज्य | दुकान कैसे मिलती है | 2026 में एंट्री की कीमत |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | e-lottery (2025-26 नीति में पहली बार, 7 साल बाद renewal की जगह) | composite shop ₹55,000 (ग्रामीण) से ₹90,000 (बड़े महानगर); model shop ₹60,000-₹1,00,000; देसी शराब ₹40,000-₹65,000 |
| कर्नाटक | पुराने CL-2 का renewal, या MSTC पर CL-2A की e-auction | नीलामी base price: बेंगलुरु ₹1.5 करोड़, बेलगावी/बल्लारी ₹1.1 करोड़, छोटे शहर ₹70 लाख; application fee ₹50,000, EMD लगभग 3% (जनवरी 2026 नीलामी) |
| महाराष्ट्र | नए FL-II और CL-III लाइसेंस बंद; सिर्फ़ मौजूदा लाइसेंस का transfer या lease | आधिकारिक application fee ₹2,000 (1 लाख से ज़्यादा आबादी वाले इलाके में), बाकी जगह ₹1,000; सालाना fee की schedule सार्वजनिक पेज पर नहीं है |
| दिल्ली | निजी retail लाइसेंस मौजूद ही नहीं | L-6 (देसी शराब व बीयर retail) ₹4 लाख/साल, पर सिर्फ़ चार सरकारी corporations को; mall/airport का L-10 ₹8 लाख |
कर्नाटक और उत्तर प्रदेश का फर्क इस धंधे की पूरी कहानी है। UP में फीस एक लाख से कम है पर दुकान लॉटरी से निकलती है, पैसे से नहीं खरीदी जा सकती, और एक व्यक्ति ज़्यादा से ज़्यादा दो दुकानें ले सकता है। कर्नाटक में जनवरी 2026 में 579 निष्क्रिय लाइसेंस (477 retail CL-2A और 92 bar CL-9A) MSTC के ज़रिए 13 से 20 जनवरी के बीच नीलाम किए गए, जिनमें SC/ST आरक्षण भी था और सरकार को बेंगलुरु में ₹3 करोड़ तक की बोली की उम्मीद थी।
दिल्ली की स्थिति अलग ही है। 2021-22 की निजी retail वाली excise policy सितंबर 2022 में वापस ले ली गई थी, तब से करीब 725-728 vends चार सरकारी निगम (DTTDC, DSIIDC, DSCSC, DCCWS) चलाते हैं। 19 मार्च 2026 को पुरानी व्यवस्था चौथी बार बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी गई। मतलब साफ है: 2026 में दिल्ली में कोई निजी व्यक्ति शराब की दुकान नहीं खोल सकता, ज़्यादा से ज़्यादा अपनी दुकान की जगह किसी सरकारी निगम को दे सकता है।
फीस देखते वक्त यह भी याद रखिए कि excise कई राज्यों की टॉप-3 अपनी कर आय में गिना जाता है। अकेले दिल्ली ने 2024-25 में ₹5,068 करोड़ excise से कमाए। 2020 के lockdown में unlock के पहले ही चरण में शराब की दुकानें खोल दी गई थीं, और वजह यही राजस्व निर्भरता थी। किस राज्य की जेब कहाँ से भरती है, यह सबसे ज़्यादा टैक्स देने वाले राज्यों की तस्वीर से भी समझ आता है।
कौन-कौन से liquor licence होते हैं और दुकान के लिए कौन-सा चाहिए?
भारत में लाइसेंस मोटे तौर पर चार तरह के हैं: off-licence retail (बोतल बंद बिकती है, ग्राहक बाहर ले जाता है), on-licence bar या permit room (मौके पर पीने की इजाज़त), wholesale और temporary event permit। शराब की दुकान खोलनी है तो आपको पहली श्रेणी चाहिए, और उसका कोड हर राज्य में अलग है।
- महाराष्ट्र: FL-II वाइन शॉप, CL-III देसी शराब की दुकान (दोनों में नए लाइसेंस बंद हैं), FL-BR-II बीयर शॉपी और E-2 वाइन बार अब भी नए मिलते हैं; FL-III permit room on-licence है।
- कर्नाटक: CL-2 retail दुकान, CL-9 bar और restaurant।
- दिल्ली: L-1 और L-1F wholesale, L-6 retail (देसी शराब व बीयर, सिर्फ़ सरकारी निगम), L-6FG उस पर foreign liquor का add-on (L-6 फीस का 10%), L-10 mall व airport retail, L-15/L-16 होटल, L-17/L-18 रेस्टोरेंट, L-28/L-29 क्लब और L-30 निजी possession permit।
- उत्तर प्रदेश: 2025-26 नीति से composite shop, जिसमें बीयर, IMFL और वाइन एक ही काउंटर से बिकती है, साथ में model shop और country liquor shop।
शादी या पार्टी के लिए अलग temporary permit चाहिए। दिल्ली में 2026 में P-10 (निजी समारोह) ₹7,500 है, और अगर जगह motel, banquet hall या farmhouse है जिसका अपना लाइसेंस नहीं, तो ₹15,000। व्यावसायिक आयोजनों का P-10A ₹1,00,000 है और 24 से 31 दिसंबर के बीच ₹2,00,000। जिस होटल, रेस्टोरेंट या क्लब के पास पहले से लाइसेंस है, वहाँ किसी function के लिए P-13 सिर्फ़ ₹5,000 का पड़ता है।
एक बात साफ कर देनी चाहिए: tavern, brewpub या "50% revenue from liquor" जैसी श्रेणियाँ अमेरिकी लाइसेंसिंग की हैं, किसी भारतीय राज्य की excise अधिसूचना में ये नहीं मिलेंगी।
चार राज्यों में पूर्ण शराबबंदी है, वहाँ retail लाइसेंस जारी ही नहीं होता: गुजरात (1960), नागालैंड (1989), बिहार (2016) और मिज़ोरम (2019 में दोबारा लागू)। मणिपुर के चार घाटी ज़िलों में आंशिक पाबंदी रही है और दिसंबर 2023 में राज्य ने बंदी हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया था। मध्य प्रदेश ने अप्रैल 2025 से 19 धार्मिक नगरों में बिक्री बंद कर दी। लक्षद्वीप में सेवन पर पाबंदी है। आवेदन से पहले अपने ज़िले की स्थिति excise विभाग से पक्की कर लीजिए, क्योंकि आंशिक पाबंदियाँ नगर-स्तर पर भी लगती हैं।
वाइन शॉप खोलने में कुल कितना पैसा लगता है?
कुल निवेश का 2026 में कोई एक राष्ट्रीय आँकड़ा देना बेईमानी होगी, क्योंकि सबसे बड़ा खर्च लाइसेंस है और वह राज्य के आवंटन तरीके पर टिका है। सिर्फ़ लाइसेंस की entry cost UP की ₹40,000-₹1 लाख से लेकर कर्नाटक की ₹70 लाख से ₹1.5 करोड़ base price वाली नीलामी तक जाती है। बाकी खर्च इसके ऊपर हैं।
पूँजी की गिनती इन हिस्सों में कीजिए:
लाइसेंस फीस या नीलामी की बोली, और उसके साथ लगने वाला application fee तथा EMD या security deposit (कर्नाटक की नीलामी में ₹50,000 आवेदन शुल्क और लगभग 3% EMD था)। फिर दुकान की जगह, जो या तो खरीदनी है या किराए पर लेनी है, और उसका advance। शुरुआती स्टॉक, जो लाइसेंस के बाद सबसे बड़ी रकम होती है क्योंकि शराब का पैसा आमतौर पर पहले चुकाना पड़ता है, बाद में बिक्री होती है। इसके बाद counter, shelving, तिजोरी, CCTV, बीयर के लिए chiller या cold storage, और excise के हिसाब-किताब व stock register के लिए staff।
Working capital को अलग रखिए। बिक्री का पैसा रोज़ आता है, यह इस धंधे की सबसे अच्छी बात है, पर स्टॉक की अगली खेप के लिए पैसा तैयार रखना पड़ता है। अपने राज्य के corporation या अधिकृत wholesaler से भुगतान की शर्तें लिखित में समझ लें कि पैसा पहले देना है या डिलीवरी पर, इसी से आपकी नकदी की साइकिल तय होगी।
अगर यह पूँजी बहुत बड़ी लग रही है तो एक ही निवेश-श्रेणी में दूसरे विकल्प भी हैं, जैसे लाइसेंस-आधारित मेडिकल स्टोर या वितरण वाला सॉफ्ट ड्रिंक एजेंसी का काम, जहाँ नियम सख्त हैं पर entry इतनी महँगी नहीं। बहुत कम पूँजी में शुरू करना हो तो चाय की दुकान जैसा मॉडल दूसरे सिरे पर बैठता है।
वाइन शॉप का लाइसेंस कैसे अप्लाई करें?
आवेदन का रास्ता राज्य के आवंटन तरीके से तय होता है, इसलिए पहला काम यह पता करना है कि आपके राज्य में इस साल नई दुकान का रास्ता खुला भी है या नहीं।
उत्तर प्रदेश में 2025-26 में सारी दुकानें e-lottery से बँटीं, आवेदन ऑनलाइन होता है, एक व्यक्ति एक ही आवेदन कर सकता है और ज़्यादा से ज़्यादा दो दुकानें रख सकता है; 2026-27 से renewal की व्यवस्था लौट रही है। कर्नाटक में या तो मौजूदा CL-2 का renewal होता है या MSTC पोर्टल पर CL-2A की नीलामी में हिस्सा लेना पड़ता है, जिसमें ₹1,000 + GST का registration, ₹50,000 का application fee और EMD जमा करना होता है। महाराष्ट्र में नए FL-II नहीं मिलते, इसलिए वहाँ आवेदन का मतलब है exciseservices.mahaonline.gov.in के ज़रिए किसी मौजूदा लाइसेंस का transfer या lease। दिल्ली में निजी retail लाइसेंस का कोई आवेदन ही नहीं है।
पात्रता की शर्तें ज़्यादातर राज्यों में मिलती-जुलती हैं: आवेदक बालिग हो, आपराधिक रिकॉर्ड न हो, और दुकान की जगह दूरी के नियम पूरे करती हो। दिल्ली में स्कूल और धार्मिक स्थल से 100 मीटर तथा 50 से ज़्यादा बिस्तर वाले अस्पताल से दूरी का नियम है, और दुकान कम से कम 300 वर्ग फुट की चाहिए; महाराष्ट्र में न्यूनतम क्षेत्रफल 16 वर्ग मीटर है। हाईवे और राज्य-विशिष्ट दूरी नियम अलग से देखने पड़ते हैं।
कागज़ों की सूची भी काफ़ी हद तक तय है: पहचान पत्र (PAN, आधार), पते का प्रमाण, फोटो, दुकान का मालिकाना कागज़ या rent agreement और site plan, नगर निगम NOC, fire NOC, पुलिस चरित्र सत्यापन, आपराधिक रिकॉर्ड न होने का शपथपत्र, solvency certificate (महाराष्ट्र में), पिछले साल का ITR, और कंपनी के मामले में MOA/AOA तथा incorporation के कागज़।
आवेदन जमा होने के बाद excise विभाग जगह का सत्यापन करता है और आपत्ति के लिए एक अवधि देता है, जिसमें आसपास के लोग या संस्थाएँ एतराज़ दर्ज करा सकती हैं। लाइसेंस excise year के हिसाब से सालाना नवीनीकृत होता है, यानी हर साल फीस और शर्तें नई नीति के हिसाब से बदल सकती हैं। अंतिम फीस, फ़ॉर्म और तारीखें हमेशा अपने राज्य के excise विभाग की वेबसाइट से मिलाइए, और बड़ी बोली लगाने से पहले किसी CA या वकील से कागज़ जँचवा लीजिए।
एक दुकान दूसरी से ज़्यादा मुनाफ़ा क्यों कमाती है?
एक ही राज्य, एक ही लाइसेंस, फिर भी दो दुकानों के मुनाफ़े में ज़मीन-आसमान का फर्क होता है, और वजहें गिनी जा सकती हैं।
लोकेशन और दूरी के नियम। highway, बाज़ार, बस अड्डा या residential cluster के पास की दुकान का फुटफॉल अलग होता है, पर स्कूल और धार्मिक स्थल से दूरी के नियम अक्सर सबसे अच्छी जगहों को बाहर कर देते हैं। जो जगह नियम और भीड़, दोनों पर खरी उतरे, वही असली संपत्ति है।
प्रोडक्ट मिक्स। premium और imported बोतलों तथा वाइन पर retailer margin घरेलू IMFL और बीयर से ऊँचा रहता है। जिस इलाके में ऐसे ग्राहक हैं, वहाँ premiumisation सीधे net profit बढ़ाती है।
राज्य का टैक्स ढाँचा। ISWAI के आँकड़ों पर आधारित 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक MRP में टैक्स का हिस्सा गोवा में सबसे कम, करीब 49% है, जबकि कर्नाटक में लगभग 83%, महाराष्ट्र में 71%, उत्तर प्रदेश में 66% और दिल्ली में 62%। गोवा में Kingfisher की 650 ml बोतल जून 2025 में ₹60 से ₹90 के बीच मिलती थी। कम टैक्स का मतलब सस्ती बोतल और ज़्यादा वॉल्यूम है, ज़रूरी नहीं कि हर बोतल पर ज़्यादा मुनाफ़ा।
Home delivery। ऐप से घर तक शराब पहुँचाने की इजाज़त पश्चिम बंगाल और ओडिशा में है। दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, गोवा और केरल में pilot पर चर्चा की खबरें आती रही हैं, ज़्यादातर बीयर और वाइन से शुरू करने की। Zomato ने 2021 में यह सेवा बंद कर दी थी। किसी भी राज्य में अंतरराज्यीय e-commerce बिक्री की इजाज़त नहीं है।
प्रतिस्पर्धा और कोटा। ज़्यादातर राज्य दुकानों की संख्या सीमित रखते हैं, इसलिए आपकी दुकान से अगली दुकान कितनी दूर है, यह मुनाफ़े को सीधे तय करता है। नीलामी वाले राज्यों में यही कमी लाइसेंस की कीमत भी चढ़ाती है।
मौसम और dry days। त्योहारों और शादी के मौसम में बिक्री उछलती है, रमज़ान और नवरात्रि जैसे समय तथा घोषित dry days पर गिरती है। सालाना अनुमान बनाने से पहले अपने राज्य की घोषित dry-day सूची देखिए और उतने दिन हिसाब से घटा दीजिए।
क्या शराब की दुकान खोलना अच्छा business है?
फ़ायदे असली हैं। माँग स्थिर रहती है और मंदी में भी बहुत नहीं गिरती, स्टॉक खराब नहीं होता इसलिए wastage नाम मात्र की है, बिक्री ज़्यादातर नकद या UPI पर होती है, और उधार का झंझट किराना जैसे धंधों के मुक़ाबले बहुत कम है।
जोखिम उतने ही असली हैं, और वे ज़्यादातर सरकार की कलम से आते हैं। दिल्ली इसका सबसे साफ उदाहरण है: 2021-22 में निजी retail के लिए दरवाज़ा खुला, सितंबर 2022 में नीति वापस, और मार्च 2026 में पुरानी व्यवस्था चौथी बार 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई। जिन्होंने उस नीति के भरोसे निवेश किया था, उनका पैसा नीति के साथ ही फँस गया।
महाराष्ट्र का 2025 का उदाहरण दूसरी तरह का जोखिम दिखाता है। जून 2025 में IMFL पर excise duty manufacturing cost के 3 गुना से बढ़ाकर 4.5 गुना कर दी गई और देसी शराब पर ₹205 प्रति proof litre तय हुआ। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक 180 ml व्हिस्की ₹160 से ₹220 पर पहुँच गई, ग्राहक सस्ते विकल्पों की तरफ खिसके, और वितरकों का margin 3-4% घटा। साथ ही Maharashtra Made Liquor नाम की नई grain-spirit श्रेणी आई जो सिर्फ़ FL-II और FL-III से बिकती है। एक ही अधिसूचना ने पूरी दुकान का गणित बदल दिया।
इनके अलावा ऊँची entry capital, हर साल का नवीनीकरण, dry days, नाबालिग को बिक्री या तय समय के बाद बिक्री पर लाइसेंस रद्द होने का ख़तरा, और स्थानीय विरोध का सामाजिक पहलू भी हिसाब में रखिए।
यह धंधा उनके लिए है जिनके पास लाइसेंस और स्टॉक दोनों के लिए अपनी पूँजी है, जो excise के कागज़ी अनुशासन से नहीं घबराते, जिनके पास नियमों पर खरी उतरने वाली जगह है, और जो यह मानकर चलते हैं कि नीति अगले साल बदल सकती है। अगर पूँजी उधार की है और वापसी का पूरा भरोसा एक ही साल की policy पर टिका है, तो जोखिम बहुत ज़्यादा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुंबई या महाराष्ट्र में शराब की दुकान का लाइसेंस कितने का मिलता है?
2026 में नए FL-II (वाइन शॉप) और CL-III लाइसेंस महाराष्ट्र में जारी ही नहीं हो रहे, इसलिए कीमत मौजूदा लाइसेंस के transfer या lease के बाज़ार से तय होती है, किसी सरकारी रेट से नहीं। राज्य excise विभाग के पेज पर सिर्फ़ application fee दिखता है: 1 लाख से ज़्यादा आबादी वाले इलाके में ₹2,000, बाकी जगह ₹1,000। नई FL-BR-II बीयर शॉपी और E-2 वाइन बार अब भी मिल सकते हैं।
क्या भारत में शराब ऑनलाइन बेची जा सकती है?
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ऐप के ज़रिए ऑर्डर और होम डिलीवरी की इजाज़त है। दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, गोवा और केरल में pilot की चर्चा की खबरें रही हैं, पर 2026 तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली। एक राज्य से दूसरे राज्य में e-commerce के ज़रिए शराब बेचना कहीं भी वैध नहीं है।
बीयर पर दुकानदार को कितना margin मिलता है?
retailer margin राज्य सरकार MRP के एक घटक के रूप में तय करती है, और 2026 के लिए कोई आधिकारिक प्रतिशत सार्वजनिक नहीं है। बीयर पर margin बाकी श्रेणियों से कम रहता है और उसकी भरपाई वॉल्यूम से होती है। पक्का आँकड़ा अपने राज्य की excise price notification से ही लीजिए।
शराब की दुकान महीने में कितना कमाती है?
2026 के ट्रेड अनुमान कस्बे की दुकान के लिए ₹50,000 से ₹1.5 लाख, मध्यम शहर के लिए ₹2 से ₹5 लाख और मेट्रो की व्यस्त दुकान के लिए ₹6 से ₹12 लाख महीना net बताते हैं। कोई सरकारी स्रोत दुकान-स्तर का मुनाफ़ा प्रकाशित नहीं करता, इसलिए इन्हें रेंज मानिए, वादा नहीं।
क्या दिल्ली में कोई निजी व्यक्ति शराब की दुकान खोल सकता है?
नहीं। सितंबर 2022 में निजी retail वाली नीति वापस लेने के बाद दिल्ली के करीब 725 vends चार सरकारी निगम चलाते हैं, और मार्च 2026 में यही व्यवस्था 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई। निजी व्यक्ति ज़्यादा से ज़्यादा अपनी जगह किसी निगम को दुकान के लिए दे सकता है।