Customer ko kitna udhaar dena chahiye: हर ग्राहक की limit तय करने का आसान हिसाब (2026)

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Customer ko kitna udhaar dena chahiye: हर ग्राहक की limit तय करने का आसान हिसाब (2026)

Customer ko kitna udhaar dena chahiye: हर ग्राहक की limit तय करने का आसान हिसाब (2026)

Customer ko kitna udhaar dena chahiye? तीन अंगूठे के नियम: हर ग्राहक की limit उसकी महीने की खरीद का 25 से 50%, हर ग्राहक पर एक पक्की रुपये की cap, और दुकान का कुल बकाया महीने की बिक्री के 10 से 15% के अंदर। ये 2026 में दुकानदारों का अनुभव है, कोई survey नहीं।

ग्राहक को उधार देने से पहले उसे परखने का 5-point तरीका उधार देने से पहले की checklist में है। यह post सिर्फ limit के हिसाब पर है: कितना, किसको, और दुकान कुल कितना झेल सकती है।

Customer ko kitna udhaar dena chahiye: तीन अंगूठे के नियम

पहला नियम: किसी भी ग्राहक का बकाया उस रकम के 25 से 50% से ऊपर न जाए जो वह हर महीने आपकी दुकान से खरीदता है। यानी वह जितना एक महीने में खरीदता है, उसका चौथाई से आधा हिस्सा ही किसी भी वक्त उधार में हो। जो ग्राहक महीने में ₹4,000 का सामान लेता है, उसकी limit ₹1,000 से ₹2,000 के बीच बैठती है (2026 का उदाहरण)।

दूसरा नियम: percent के साथ एक पक्की रुपये की cap भी रखें। Percent वाला नियम बड़े ग्राहक पर बड़ी रकम खोल देता है, और एक ही ग्राहक पर ज़्यादा पैसा फँसना दुकान के लिए सबसे खतरनाक चीज़ है। Cap दुकान के size से तय होती है; नीचे table में तीन उदाहरण हैं।

तीसरा नियम: सब ग्राहकों का जोड़, यानी दुकान का कुल बकाया, महीने की बिक्री के 10 से 15% से नीचे रहे। Stock के हिसाब से देखें तो कुल बकाया stock की कीमत के चौथाई से ज़्यादा न हो।

ये तीनों नियम 2026 में दुकान चलाने वालों के अनुभव से निकले हैं, इनका कोई सरकारी या industry standard नहीं है। कम margin वाली दुकान नीचे वाले सिरे पर रहे; कपड़ा या hardware जैसी ज़्यादा margin वाली दुकान थोड़ा ऊपर जा सकती है।

उधार limit के तीन अंगूठे के नियम: हर ग्राहक की limit उसकी महीने की खरीद का 25 से 50% (₹4,000 की खरीद पर ₹1,000 से ₹2,000), ऊपर से एक पक्की रुपये की cap, और दुकान का कुल बकाया महीने की बिक्री के 10 से 15% के अंदर और stock की कीमत के चौथाई से कम तीनों नियम एक साथ चलते हैं: percent से limit, cap से ऊपरी सीमा, और कुल बकाये से दुकान की हद।

Per-customer limit का हिसाब कैसे लगाएं?

हिसाब शब्दों में: ग्राहक की महीने की खरीद निकालें, उसका 25% शुरू की limit है, अच्छे record पर 50% तक बढ़ाएँ, पर दुकान की cap से ऊपर कभी नहीं।

मान लीजिए एक ग्राहक हर महीने करीब ₹6,000 का सामान लेता है (2026 का उदाहरण)। 6,000 का 25% हुआ 1,500 और 50% हुआ 3,000। नया ग्राहक हो तो limit ₹1,500 से शुरू करें। दो-तीन महीने तय तारीख पर पूरा हिसाब हो गया, तो ₹3,000 तक जाएँ। और अगर दुकान की per-customer cap ₹2,500 है, तो ₹2,500 पर ही रुकें, चाहे ग्राहक कितना भी खरीदता हो।

₹6,000 महीने की खरीद वाले ग्राहक की limit का हिसाब: नया ग्राहक 25% यानी ₹1,500 से शुरू, दो-तीन महीने तय तारीख पर पूरा हिसाब होने पर 50% यानी ₹3,000 तक, पर दुकान की cap ₹2,500 पर ही रुकना एक ग्राहक, एक हिसाब: 25% से शुरू, record अच्छा हो तो 50% तक, और cap की लकीर पार कभी नहीं।

हर ग्राहक को उसके भुगतान के record से एक रंग दें। हरा ग्राहक तय तारीख पर पूरा पैसा देता है; उसकी limit 50% की तरफ बढ़ सकती है। पीला ग्राहक पैसा देता तो है, पर देर से या टुकड़ों में; उसे 25% पर रोकें। लाल ग्राहक की दो बार तारीख निकल चुकी है और पूरा हिसाब नहीं हुआ; जब तक पुराना साफ नहीं होता, नया उधार नहीं। पीले से लाल में जाने के संकेत पहले से दिखते हैं, वे defaulter के warning signs वाली post में हैं।

भुगतान के record से ग्राहक के तीन रंग: हरा ग्राहक तय तारीख पर पूरा पैसा देता है और उसकी limit 50% तक बढ़ सकती है, पीला ग्राहक देर से या टुकड़ों में देता है इसलिए 25% पर रोकें, लाल ग्राहक की दो बार तारीख निकल चुकी है इसलिए पुराना साफ होने तक नया उधार नहीं; बिल्कुल नया ग्राहक ₹500 से ₹1,000 से शुरू हर ग्राहक को उसके record से एक रंग, और रंग से उसकी limit। खाते में page के ऊपर दोनों लिख दें।

बिल्कुल नए ग्राहक की महीने की खरीद का पता ही नहीं होता, इसलिए percent का हिसाब लगता ही नहीं। ऐसे में सीढ़ी चलाएँ: पहली limit छोटी, ₹500 से ₹1,000 (2026 का उदाहरण)। दो-तीन बार साफ settlement हो जाए, तब उसकी असली खरीद देखकर percent वाला नियम लागू करें।

दुकान कुल कितना उधार झेल सकती है?

दुकान का कुल बकाया महीने की बिक्री के 10 से 15% और stock की कीमत के चौथाई के अंदर रहना चाहिए, क्योंकि उधार में गया हर रुपया वही रुपया है जिससे अगला माल आना था।

एक उदाहरण (2026): दुकान की महीने की बिक्री ₹3 लाख है, counter और गोदाम में ₹2 लाख का stock है, और supplier से हर महीने करीब ₹2.2 लाख का माल आता है। नियम के हिसाब से कुल बकाया ₹30,000 से ₹45,000 के बीच रहना चाहिए। यह ₹70,000 पहुँच गया, तो supplier का बिल चुकाने के लिए वही पैसा कम पड़ेगा। कम माल, खाली shelf, और नकद वाले ग्राहक भी दूसरी दुकान चले जाते हैं। उधार का असली नुकसान डूबा हुआ पैसा नहीं, रुकी हुई restocking है।

Supplier का credit इसी बही का दूसरा पन्ना है। Supplier ने 7 या 15 दिन का उधार दिया है और आपने ग्राहक को 30 दिन का, तो बीच का gap आपकी जेब से भरता है। ग्राहकों की settlement तारीख हमेशा supplier की payment तारीख से पहले रखें।

यह तंगी सिर्फ आपकी नहीं है; working capital की कमी छोटी दुकानों की एक आम शिकायत है। जब दुकान की अपनी जेब पहले से तंग हो, तो ग्राहक का हर उधार सीधे अगले माल से मुकाबला करता है।

छोटी, मझली और बड़ी दुकान के लिए उदाहरण

नीचे के सब आँकड़े 2026 के गोल, illustrative उदाहरण हैं, ऊपर के अंगूठे के नियमों से निकाले हुए। यह कोई survey नहीं है; अपनी दुकान के हिसाब से बदलें।

दुकान महीने की बिक्री (2026) कुल उधार की cap Per-customer cap उधार वाले ग्राहक (लगभग)
छोटी ₹1,50,000 ₹20,000 ₹1,000 से ₹2,000 10 से 15
मझली ₹4,00,000 ₹50,000 ₹2,500 से ₹5,000 12 से 18
बड़ी ₹10,00,000 ₹1,20,000 ₹6,000 से ₹10,000 15 से 20

हिसाब ऐसे निकला है। कुल cap बिक्री का लगभग 12 से 13% है। Per-customer cap कुल cap का 5 से 10% रखी है, ताकि एक ग्राहक डूबे तो कुल बकाये का दसवाँ हिस्सा ही जाए, दुकान नहीं। ग्राहकों की गिनती कुल cap को औसत per-customer limit से भाग देकर आती है। मतलब साफ है: छोटी दुकान 10 से 15 से ज़्यादा ग्राहकों को उधार पर नहीं चला सकती, और गिनती बढ़ानी है तो हर ग्राहक की limit घटानी पड़ेगी।

तीन दुकान size के 2026 के illustrative उदाहरण: छोटी दुकान ₹1,50,000 बिक्री पर कुल cap ₹20,000, per-customer cap ₹1,000 से ₹2,000, 10 से 15 ग्राहक; मझली दुकान ₹4,00,000 पर ₹50,000, ₹2,500 से ₹5,000, 12 से 18 ग्राहक; बड़ी दुकान ₹10,00,000 पर ₹1,20,000, ₹6,000 से ₹10,000, 15 से 20 ग्राहक; कुल cap बिक्री का 12 से 13%, per-customer cap कुल cap का 5 से 10% तीनों दुकानों में एक ही हिसाब: कुल cap बिक्री से, per-customer cap कुल cap से, और ग्राहकों की गिनती दोनों के भाग से।

Limit पार होने पर क्या करें?

Limit पार हो गई तो नया उधार तभी लिखें जब पुराने का कम से कम एक हिस्सा आ जाए, और हर ग्राहक की एक तय settlement तारीख हो।

तारीख ग्राहक की आमदनी से बाँधें: नौकरी वाले के लिए महीने की 1 से 5, दिहाड़ी वाले के लिए हफ्ते का एक दिन, किसान के लिए मंडी का दिन। तारीख तय हो तो माँगना हिसाब का हिस्सा बन जाता है, एहसान नहीं। Limit पर पहुँचे ग्राहक से कहने की दो लाइनें काफी हैं (2026 के उदाहरण): "पुराना ₹2,000 चल रहा है, आधा आज दे दीजिए, फिर आज का सामान लिख देता हूँ।" या "आपकी limit पूरी हो गई, 5 तारीख को हिसाब कर लें, फिर आगे चलेगा।" न गुस्सा, न सफाई, बस नियम।

Part-payment का एक कानूनी फायदा भी है। Limitation Act, 1963 के मुताबिक उधार की वसूली के लिए court जाने की मियाद आम तौर पर 3 साल है (माल की delivery से, या तय credit period खत्म होने से)। Section 19 कहता है कि 3 साल पूरे होने से पहले ग्राहक ने कुछ रकम चुकाई और उस payment का ज़िक्र ग्राहक के अपने हाथ की लिखावट में या उसके signed कागज़ में हो, तो उसी तारीख से नई 3 साल की मियाद शुरू होती है। सिर्फ आपके खाते की entry इसके लिए काफी नहीं मानी जाती; ग्राहक की signed slip या उसका अपना UPI note/message ज़्यादा मज़बूत सबूत है। Act का पूरा text India Code पर है। बड़ी रकम या झगड़े वाला मामला हो तो वकील से सलाह लें। फँसे हुए उधार पर अलग post है: क्या मेरा फँसा उधार वापस आएगा।

त्योहार और शादी के season में limit ऊपर जाना आम है, और गलत भी नहीं। गलत तब होता है जब बढ़ी हुई limit season के बाद भी चलती रहे। बढ़ाते समय ही तारीख बोल दें (2026 का उदाहरण): "Diwali तक ₹5,000, उसके बाद वापस ₹3,000।" Season खत्म होते ही पहले बढ़ी हुई रकम उतरे, उसके बाद ही सामान्य limit पर नया उधार शुरू हो। जो ग्राहक season की रकम नहीं उतार पा रहा, उसके लिए उधार वसूली के 10 तरीके देखें।

उधार की limit का record कैसे रखें?

हर ग्राहक का चालू बकाया counter पर एक नज़र में दिखे, हर entry के साथ तारीख हो, और महीने में एक बार पूरी list की review हो। Limit तभी काम करती है जब बकाया याद रहे। कागज़ के खाते में हर ग्राहक के page के ऊपर उसकी limit और रंग लिख दें। बिना तारीख की entry से न settlement की गिनती होती है, न 3 साल की मियाद पता चलती है।

महीने के आखिर में तीन काम: हर ग्राहक का रंग फिर से तय करें, कुल बकाया निकालकर उसे बिक्री के percent में देखें, और 15% से ऊपर हो तो उसे अगले महीने का target बनाएँ। Udhaar का हिसाब रखने के लिए OkCredit जैसा free digital khata app use कर सकते हैं; हर entry का SMS ग्राहक को भी भेजा जा सकता है, और ऑटो रिमाइंडर चालू हो तो बकाये पर SMS reminder अपने आप चला जाता है (आपके अपने phone से)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एक customer को ज़्यादा से ज़्यादा कितना उधार देना चाहिए?

अंगूठे का नियम: ग्राहक की महीने की खरीद का 25 से 50%, और उसके ऊपर दुकान की पक्की cap। महीने में ₹4,000 खरीदने वाले की limit ₹1,000 से ₹2,000 (2026 का उदाहरण)। यह दुकानदारों का अनुभव है, कोई सरकारी standard नहीं।

नए customer को पहली बार कितना उधार दें?

छोटी रकम, ₹500 से ₹1,000 (2026 का उदाहरण), क्योंकि उसकी महीने की खरीद का अभी पता नहीं। दो-तीन बार तय तारीख पर पूरा हिसाब हो जाए, तब उसकी असली खरीद देखकर percent वाला नियम लागू करें।

दुकान में कुल कितना उधार चलाना चाहिए?

सब ग्राहकों का कुल बकाया महीने की बिक्री के 10 से 15% के अंदर, और stock की कीमत के चौथाई से कम। ₹3 लाख महीने की बिक्री पर ₹30,000 से ₹45,000 (2026 का उदाहरण)। इससे ऊपर गया तो supplier का बिल और restocking रुकने लगती है।

क्या उधार की limit ग्राहक को बतानी चाहिए?

हाँ, शुरू में ही। बताई हुई limit पर रुकना नियम लगता है, बिना बताई limit पर रुकना अपमान। "आपका ₹2,000 तक चलेगा, हर 5 तारीख को हिसाब" (2026 का उदाहरण) जैसी एक लाइन बाद की बहस बचा देती है।

पुराना उधार कितने साल तक court में माँगा जा सकता है?

Limitation Act, 1963 के मुताबिक आम तौर पर 3 साल। 3 साल पूरे होने से पहले ग्राहक ने part-payment की और उसका ज़िक्र ग्राहक के हाथ की लिखावट या signed कागज़ में हो, तो उस तारीख से नई 3 साल की मियाद शुरू होती है। किसी भी असली मामले में वकील से सलाह लें।